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बीजेपी सांसदों में क्यों मचा हड़कंप! लोकसभा चुनाव 2024 में किसका होने वाला है पत्ता साफ

देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बीच ही बीजेपी जोर-शोर से लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रांची में एक जनसभा को संबोधित किया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रांची में रोड शो के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करने की कोशिश की। जबकि पीएम मोदी ने खूंटी में आयोजित एक कार्यक्रम में 50 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात देने के साथ ही जनसभा को भी संबोधित किया।
बीजेपी तकनीक से सुसंपन्न पार्टी है। संगठन की ओर से पार्टी के सभी सांसदों के कार्याें का मूल्यांकन को लेकर गुप्त सर्वे चल रहा है। राज्य की सभी 14 लोकसभा सीटों में सर्वे चल रहा है। पार्टी की ओर से लोकसभा चुनाव 2024 को ध्यान में रखते हुए जनता और कार्यकर्ताओं की नजर में योग्य उम्मीदवार की तलाश के लिए सर्वे कराया जा रहा है। पार्टी की ओर से कराए जा रहे सर्वे के बाद कई वर्तमान सांसदों का टिकट सकता हैं, वहीं कुछ नए चेहरे को मौका मिल सकता है। बताया जा रहा है कि बीजेपी तीन चरणों में रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रही है। अंतिम चरण का रिपोर्ट कार्ड दिसंबर में फाइनल हो जाने की संभावना है। सर्वे में सांसदों और उनके परिजनों का पूरा लेखा-जोखा, सांसद ने क्या काम किए, और जनता का फीडबैक क्या है, इसकी पूरी जानकारी एकत्रित की जा रही है। इस सर्वे के कारण बीजेपी के कई वर्तमान सांसदों के होश उड़े हैं।

सर्वे से प्राप्त फीडबैक के बाद ही अंतिम फैसला

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने झारखंड में 14 लोकसभा सीटों में से 11 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि एक सीट पर एनडीए में शामिल सहयोगी दल आजसू पार्टी को जीत मिली थी। जबकि एक सीट पर जेएमएम और एक सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को जीत मिली थी। अब बीजेपी के आंतरिक सर्वे के बाद कई संसदीय क्षेत्रों में उलटफेर की गुंजाइश बनती दिख रही है। किस सांसद को फिर से मौका मिलेगा और किनका पत्ता कटेगा, सर्वे में प्राप्त फीडबैक के बाद ही अंतिम फैसला होगा।

सांसद सुनील सोरेन की लोकप्रियता के ग्राफ का आकलन

मध्य प्रदेश में बीजेपी ने 75 वर्ष से अधिक उम्र वाले को टिकट नहीं देने की अघोषित नीति से समझौता किया। 80 साल के उम्मीदवारों को भी टिकट मिला। लेकिन झारखंड में इस अघोषित नीति का किस तरह से पालन किया जाएगा, यह कहना अभी मुश्किल है। हालांकि चर्चा है कि संताल परगना के एक सांसद का टिकट उनके परफॉरमेंस के कारण खतरे में पड़ने की संभावना है। पार्टी के अंदर चर्चा है कि दुमका के सांसद सुनील सोरेन की मुश्किलें बढ़ सकती है। उनकी लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ा है या नहीं, इसका आकलन पार्टी नेतृत्व की ओर से किया जा रहा है।

अन्नपूर्णा देवी ओबीसी चेहरा रहेंगी या बदलाव होगा

दूसरी चर्चा केंद्रीय मंत्री और कोडरमा की बीजेपी सांसद अन्नपूर्णा देवी को लेकर है। अन्नपूर्णा देवी को बीजेपी ने राज्य में ओबीसी चेहरा के रूप में सामने रखते हुए मतदाताओं को संदेश देने का प्रयास किया। उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी मौका दिया। लेकिन पार्टी के अंदर ही एक गुट उनके खिलाफ लगातार सक्रिय है। ऐसे में अन्नपूर्णा देवी वर्ष 2024 के चुनाव में भी ओबीसी चेहरा बनीं रहेंगी या बदलाव होगा, इसका आकलन किया जा रहा है।

धनबाद में पीएन सिंह की जगह सरयू राय की दावेदारी!

धनबाद में बीजेपी सांसद पीएन सिंह की जगह विधायक सरयू राय की दावेदारी की बात सामने आ रही हैं। हालांकि सरयू राय अभी निर्दलीय विधायक हैं, लेकिन रघुवर दास के झारखंड की सक्रिय राजनीति से दूर होने के बाद सरयू राय के फिर से बीजेपी में शामिल होने की चर्चा जोर-शोर से चल रही है। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों बाबूलाल मरांडी के साथ नई दिल्ली में सरयू राय ने बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात भी की थी।

पलामू सीट में भी बदलाव की चर्चा

पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम को लेकर पार्टी के अंदर कई तरह की चर्चा हो रही है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि नौकरशाह से सांसद बने विष्णु दयाल राम की छवि आज भी क्षेत्र में एक आईपीएस अधिकारी के रूप में ज्यादा नजर आती है, आम कार्यकर्ताओं को उनके सामने अपनी बात रखने में झिझक होती हैं, लेकिन अनुसूचित जाति सीट के लिए आरक्षित इस सीट में उनका विकल्प कौन बनेगा, इस पर मंथन जारी है।

चतरा में सुनील सिंह को लेकर भी संशय के बादल

चतरा लोकसभा सीट क्षेत्र से सुनील कुमार सिंह लगातार दो बार चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। साल 2019 के चुनाव में भी सुनील सिंह की जगह किसी दूसरे को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी। लेकिन दिल्ली में मौजूद कुछ केंद्रीय नेताओं ने उनकी जबर्दस्त तरीके से पैरवी की, जिसके कारण उनका टिकट बरकरार रहा। अब 2024 के चुनाव में सुनील सिंह कितने सफल हो जाएंगे। इसका अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है।

गिरिडीह सीट को छोड़ कर आजसू पार्टी की हजारीबाग में दावेदारी

साल 2019 के चुनाव में बीजेपी ने अपने सहयोगी दल आजसू पार्टी के लिए गिरिडीह सीट छोड़ी थी। लेकिन इस बार आजसू पार्टी सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी गिरिडीह की जगह हजारीबाग सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। चंद्रप्रकाश चौधरी हजारीबाग लोकसभा सीट के तहत आने वाले रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और इस बार उपचुनाव में उनकी पत्नी विधायक चुनी गई हैं।

सुदर्शन भगत आलाकमान के गुडबुक में, संजय सेठ के स्वास्थ को लेकर चर्चाएं तेज

लोहरदगा लोकसभा सीट से लगातार दो बार विजयी रहे सुदर्शन भगत आलाकमान के गुडबुक में हैं। वहीं रांची के सांसद संजय सेठ के स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही है। अभी इस सीट में प्रदीप वर्मा का नाम सबसे आगे चल रहा है। जमशेदपुर में विद्युत वरण महतो की उम्र और स्वास्थ को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। खूंटी लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा फिर से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि जिस तरह से कुरमी जाति को एसटी में शामिल करने को लेकर अर्जुन मुंडा का बयान आया था, उससे कुरमी समुदाय में नाराजगी की बात भी सामने आ रही हैं। लेकिन 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खूंटी पहुंचे और कई कार्यक्रमों में शामिल हुए, इससे अर्जुन मुंडा के समर्थकों में जोश हैं। गोड्डा के सांसद निशिकांत दूबे का रिपोर्ट कार्ड अब तक दुरुस्त रहा है।

राजमहल और सिंहभूम सीट पर भी बीजेपी की नजर

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी राजमहल और सिंहभूम लोकसभा सीट पर कब्जा करने में असफल रही थी। ऐसे में इन दोनों सीटों पर बीजेपी का विशेष ध्यान है। सिंहभूम की कांग्रेस सांसद गीता कोड़ा और उनके पति पूर्व सीएम मधु कोड़ा के बीजेपी में पुनर्वापसी की चर्चा है। जबकि राजमहल के जेएमएम सांसद विजय हांसदा के खिलाफ भी किसी मजबूत उम्मीदवार की तलाश में है।

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