पॉलिटिकल दलील क्यों दे रहे? SC में तुषार मेहता और कपिल सिब्बल की बहस
सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई का आज 11वां दिन है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में संविधान पीठ मामले को सुन रही है। 20 से ज्यादा याचिकाओं में आर्टिकल 370 को निरस्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश की जा चुकी हैं। सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) केंद्र सरकार की ओर से जिरह कर रहे हैं। मेहता ने कहा कि वह अदालत को दिखाएंगे जम्मू और कश्मीर का संविधान, भारत के संविधान के अधीन था। इससे पहले, 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 पर सुनवाई शुरू होते ही वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) खड़े हुए। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले यहां पर जहूर अहमद भट्ट ने जिरह की थी। इस वजह से उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। इसपर सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वह सिब्बल की शिकायत को देखें। इसके बाद एसजी तुषार मेहता ने जिरह शुरू की। सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 पर सुनवाई के अपडेट्स देखिए।
- लंच के बाद संविधान पीठ ने सुनवाई फिर शुरू की। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दलीलें पेश कर रहे हैं।
- मेहता ने अदालत को बताया कि 2023 तक, जम्मू-कश्मीर के संविधान की धारा 92 के तहत राज्यपाल शासन 8 बार और राष्ट्रपति शासन 3 बार लगाया गया है।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, आज, 370 के विघटन को कोई चुनौती नहीं है। मिस्टर सिब्बल ने जिस याचिका पर तर्क दिया, वह नैशनल कॉन्फ्रेंस से संबंधित दो संसद सदस्यों द्वारा दायर की गई याचिका है। राज्यपाल शासन, राष्ट्रपति शासन या विधान सभा भंग करने को कोई चुनौती नहीं दी गई।
- मेहता ने कहा, एक पूर्व सीएम ने 2022 में पक्षकार बनाने के लिए इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन दायर की। इसपर कपिल सिब्बल ने कहा कि ‘राज्यपाल शासन के लिए इस अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई थी जिसे जस्टिस गोगोई ने खारिज कर दिया था। मुझे बहुत खुशी होगी अगर यह अदालत यह कहे कि चूंकि इन सब को चुनौती नहीं दी गई है इसलिए अपनाई गई पूरी प्रक्रिया संवैधानिक होगी।
- इसपर एसजी ने कहा कि ‘मैं जो बहस करने जा रहा हूं, वह उस पर अनुमान क्यों लगा रहे हैं?’ सिब्बल ने कहा कि मैंने इस अदालत में कभी कोई राजनीतिक दलील नहीं दी। इसपर एसजी मेहता ने कहा कि ‘अगर कोई चुनौती नहीं है और आप दलील देते हैं कि राज्यपाल को कभी भंग नहीं करना चाहिए था, तो यह एक राजनीतिक तर्क बन जाता है।’
- SG तुषार मेहता ने आगे कहा, शुरुआत से ही जब भी राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, अनुच्छेद 3 के प्रावधान पर रोक लगा दी जाती है। हमने केवल जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि प्रत्येक राज्य के संबंध में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी की गई प्रत्येक उद्घोषणा का अध्ययन किया है। यह हर हाल में निलंबित है। इसका कारण है। एसआर बोम्मई मामले में, कानून यह है कि विधानमंडल मंत्रिपरिषद के बिना कार्य नहीं कर सकता है। इधर, विधानमंडल भी भंग कर दिया गया लेकिन अन्यथा भी जो भी प्रावधान विधायिका द्वारा कुछ किए जाने का उल्लेख करता है – वह निलंबित है। 1959 में 356 का पहला प्रयोग हुआ। श्री नंबूदरीपाद की सरकार हटा दी गई और राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 पर सुनवाई: आज क्या-क्या दलीलें दी गईं?

- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत सरकार को यह कहने और खुद को सही करने का अधिकार है कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था। सरकार खुद को सही कर सकती है, जो हमने किया। मैं उस सुधार को उचित ठहरा रहा हूं। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह सरकार और वह सरकार – यह हमारी सरकार है।
- मेहता ने कहा, ‘ अतीत की गलती की आंच भविष्य पर नहीं पड़नी चाहिए। इसीलिए, हमने 2019 के उन दिनों में जो किया, मैं उसे उचित ठहरा रहा हूं।’
- एसजी तुषार मेहता ने कहा, स्थायी निवासियों की एक अलग श्रेणी बनाई गई थी और कोई भी कानून जो इस तरह के विशेष विशेषाधिकार प्रदान करता है, वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 या संविधान के किसी भी हिस्से से प्रभावित नहीं होगा। इसका प्रभाव यह हुआ कि पीओके से हिंदू और मुस्लिम दोनों लोगों को बाहर निकाल दिया गया। उन्हें 1947 में बाहर निकाल दिया गया था। वे 2019 तक स्थायी निवासी नहीं थे। बड़ी संख्या में ऐसे सफाई कर्मचारी थे जिन्होंने IAs दाखिल किए थे और जिन्हें मैनुअल काम के लिए दूसरे राज्यों से लाया गया था। वे स्थायी निवासी नहीं है। उन्हें इनमें से कोई भी लाभ नहीं मिल रहा है। दशकों तक एक साथ रहने के बावजूद, जम्मू-कश्मीर के बाहर कोई भी व्यक्ति संपत्ति अर्जित नहीं कर सकता है। मतलब, कोई निवेश नहीं!
- एसजी मेहता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का संविधान केवल एक कानून के बराबर है। यह एक प्रकार का संविधान नहीं है जैसा कि हम समझते हैं, शासन का दस्तावेज नहीं है।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘2019 तक, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के माननीय न्यायाधीश यह शपथ लेते थे- “राज्य के संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा”। उन पर भारत का संविधान लागू करने का दायित्व था लेकिन उन्होंने जो शपथ ली वह जम्मू-कश्मीर के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करती थी।’
- मेहता ने संविधान सभा की बहस का हवाला दिया, यह स्थापित करने के लिए कि संसद ने अनुच्छेद 370 को ‘अस्थायी प्रावधान’ के रूप में देखा। इसपर सीजेआई ने कहा कि एक निजी विचार हैं। यह संसद की अभिव्यक्ति नहीं है।
- बेंच लंच के लिए उठी। सुनवाई दोपहर 2 बजे फिर शुरू होगी।



