Jharkhand

बदहाल रिम्स: 3 घंटे तक इंतजार किया मरीज न! ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड नहीं था खाली, एंबुलेंस में ही तोड़ा दम

130 किलोमीटर की दूरी से पहुंचे मरीज के 3 घंटे तक रिम्स में ऑक्सीजन बेड नहीं मिलने के कारण एंबुलेंस में ही रुद्र प्रताप सिंह की मौत हो गई. रिम्स में बदहाली की ये पहली घटना नहीं घटी है.

रिम्स में ट्रामा सेंटर एंड इमरजेंसी पहुंचने के बाद भी मरीज के परिजन बेड के लिए इधर उधर भाग 3 घंटे तक भटकते रहे. लेकिन किसी ने नहीं सुनी. गौरतलब है रिम्स में बदहाली का यह पहली घटना नहीं है. कभी मरीज को जमीन पर ही खाना परोसने तो कभी चिकित्सा कर्मियों की कमी से मरीजों के जान चले जाने तक बदहाली रिम्स की चर्चा पूरे राज्य में गूंजती है. कई बार हाई कोर्ट फटकार लग चुका है, फिर भी सुधार नहीं हो पाया.

मरीज को ऑक्सीजन ट्रॉली में भी नहीं मिल पाया

ट्रामा सेंटर में बेड खाली नहीं होने की स्थिति में ट्रॉली पर ही ऑक्सीजन दिया जाता है. लेकिन किसी स्टॉप डॉक्टर – नर्स ने ऐसा करने के लिए नहीं बताया. रिम्स के ट्रामा सेंटर में आने वाले मरीजों को जरूरी ट्रीटमेंट देने के बाद रिम्स के संबंधित वार्ड में भेज दिया जाता है. लेकिन कई बार मरीज 3 से 5 घंटे तक इमरजेंसी में ही इलाज कराते रह जाते हैं. कई बार तो मरीज स्टेबल हो जाने के बाद भी इमरजेंसी में ही पड़े रहते हैं.

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