रांची में झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने के मामले में जेपीएससी ने हाईकोर्ट में जवाब दिया। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने का फैसला सरकार का है। जेपीएससी ने हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में यह बात कही है। आयोग के अनुसार सरकार को नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार है। परिस्थितियों के अनुसार सरकार परीक्षा रद्द करने का निर्णय ले सकती है। इस मामले में आशीष अक्षत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई है। जेपीएससी ने अपने जवाब में सरकार के निर्णय को अधिकार क्षेत्र में बताया है। आयोग ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का फैसला राज्य सरकार ने लिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है।
सीडीपीओ परीक्षा को लेकर भी जेपीएससी ने अदालत में अपना पक्ष रखा है। आयोग ने कहा कि इस परीक्षा को रद्द करने का अधिकार भी सरकार के पास है। सरकार द्वारा लिया गया फैसला उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। इस मामले में सुभाष मुर्मू ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। दोनों मामलों में पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने जवाब मांगा था। अदालत के निर्देश के बाद जेपीएससी ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अब दोनों याचिकाओं पर 15 सितंबर को सुनवाई होगी। इन मामलों में परीक्षा रद्द किए जाने के कारणों पर भी नजर है। राज्य सरकार ने सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की है। सरकार ने 18 अगस्त की देर रात कई परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी।
रद्द की गई परीक्षाओं में टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाएं भी शामिल हैं। सरकार ने वर्ष 2014 से हुई नियुक्ति परीक्षाओं की जांच की बात कही है। संभावित अनियमितताओं को देखते हुए जांच कराने की घोषणा की गई थी। इसके बाद कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने संबंधित अधिसूचना जारी की। अधिसूचना में परीक्षाएं रद्द करने और प्रक्रिया स्थगित करने का उल्लेख है। कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने की जानकारी दी गई है। छह परीक्षाओं की प्रक्रिया को स्थगित किया गया है। 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल किया गया है। अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। दोनों मामलों में अदालत के फैसले पर सभी की नजर रहेगी।



