रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर से जुड़े कमेटी विवाद के मामले में सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान मंदिर के संचालन और प्रबंधन से जुड़ी स्कीम पर चर्चा की गई। इस स्कीम के अध्ययन के लिए गठित 11 सदस्यीय कमेटी ने अभी तक अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की। कमेटी ने अपने स्वरूप और कामकाज को लेकर हाईकोर्ट से मार्गदर्शन मांगा है। कमेटी ने अदालत से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया है कि उसे किन बिंदुओं पर अध्ययन करना है। सुनवाई के दौरान जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति की ओर से मामले के मेरिट पर सुनवाई करने का आग्रह किया गया। वहीं, प्रार्थियों की ओर से मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत ने इस मामले को भी गंभीरता से लिया। न्यायमूर्ति आनंदा सेन ने मंदिर की कुल जमीन के बारे में जानकारी मांगी। अदालत ने यह भी पूछा कि मंदिर की जमीन पर किसी तरह का अतिक्रमण है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई अब 16 सितंबर को होगी।
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता रोहित राय की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी को जगन्नाथपुर मंदिर के संचालन और प्रबंधन से संबंधित स्कीम का अध्ययन करना था। अध्ययन के बाद कमेटी को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करनी थी। सोमवार की सुनवाई में कमेटी ने अभी तक रिपोर्ट अदालत में दाखिल नहीं की। कमेटी ने रिपोर्ट तैयार करने से पहले अपने अधिकार और कार्यक्षेत्र को लेकर अदालत से सलाह मांगी है। अदालत अब कमेटी के कामकाज को लेकर आगे दिशा-निर्देश दे सकती है। दूसरी ओर, मंदिर न्यास समिति ने मामले की मूल याचिका पर सुनवाई करने की मांग की। प्रार्थियों ने मंदिर की जमीन से जुड़े अतिक्रमण के मुद्दे को भी अदालत के सामने रखा। अदालत ने मंदिर की जमीन की स्थिति को लेकर जानकारी मांगी है। अब अगली सुनवाई में जमीन और अतिक्रमण से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
इस मामले में झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने अदालत में पक्ष रखा। पूर्व की सुनवाई में हाईकोर्ट ने बोर्ड को महत्वपूर्ण निर्देश दिया था। अदालत ने बोर्ड को झारखंड हिंदू धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड एक्ट की धारा 32 के तहत मंदिर के संचालन और प्रबंधन की स्कीम प्रस्तुत करने को कहा था। इसके बाद बोर्ड की ओर से मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर स्कीम अदालत में पेश की गई। इसी स्कीम के अध्ययन के लिए बाद में 11 सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी को स्कीम के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करना है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मंदिर के प्रबंधन को लेकर आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है। फिलहाल कमेटी ने अपने कार्यक्षेत्र को लेकर अदालत से मार्गदर्शन मांगा है। हाईकोर्ट ने मंदिर की जमीन और अतिक्रमण से जुड़े सवाल भी उठाए हैं। अब सभी की नजरें 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं।



