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JPSC-JSSC में पदस्थापन नीति बदलने की तैयारी.

विकास आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित.

झारखंड लोक सेवा आयोग और राज्य कर्मचारी चयन आयोग में पदाधिकारियों व कर्मचारियों के पदस्थापन की नीति में बदलाव की तैयारी शुरू हो गयी है। राज्य सरकार ने मौजूदा नियमों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। इसके लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। समिति में विकास आयुक्त को अध्यक्ष बनाया गया है। कार्मिक सचिव और वित्त सचिव को समिति का सदस्य बनाया गया है। समिति दोनों आयोगों में वर्तमान पदस्थापन व्यवस्था की समीक्षा करेगी। सरकार का उद्देश्य मौजूदा व्यवस्था को बेहतर और स्पष्ट बनाना है। समीक्षा के दौरान आयोगों की स्वायत्तता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। समिति अपनी जांच और समीक्षा के बाद सरकार को अपनी अनुशंसा सौंपेगी।

अधिसूचना के अनुसार समिति झारखंड लोक सेवा आयोग और राज्य कर्मचारी चयन आयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा करेगी। इसमें आयोगों में पदस्थापित पदाधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े नियम शामिल हैं। इसके अलावा उनकी सेवा शर्तों की भी समीक्षा की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों आयोगों की स्वायत्तता को बरकरार रखा जाएगा। पदस्थापन नीति में बदलाव करते समय आयोगों के स्वतंत्र कामकाज का ध्यान रखा जाएगा। समिति वर्तमान नियमों की व्यवहारिकता की भी समीक्षा कर सकती है। जरूरत के अनुसार मौजूदा व्यवस्था में सुधार के सुझाव दिये जाएंगे। पदाधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े प्रावधानों का भी अध्ययन किया जाएगा। सेवा शर्तों में किसी तरह के बदलाव की आवश्यकता है या नहीं, इस पर भी समिति विचार करेगी। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट और अनुशंसा सरकार के समक्ष रखेगी।

सरकार की ओर से गठित समिति को पदस्थापन नीति से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं का अध्ययन करना होगा। समिति की अनुशंसा के आधार पर आगे की नीति तय की जा सकती है। फिलहाल सरकार ने केवल समीक्षा के लिए समिति का गठन किया है। नई नीति को लेकर अंतिम फैसला समिति की रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा। दोनों आयोग राज्य में भर्ती प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। ऐसे में वहां पदस्थापित कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवा व्यवस्था को लेकर यह समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का प्रयास आयोगों की स्वायत्तता और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना है। समिति की अनुशंसा आने के बाद पदस्थापन व्यवस्था में बदलाव का रास्ता साफ हो सकता है। इससे दोनों आयोगों में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े नियमों में संशोधन संभव है। फिलहाल सभी की नजर समिति की रिपोर्ट और उसकी अनुशंसाओं पर है।

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