रांची हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण भर्ती विवाद पर सुनवाई हुई। जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में कई याचिकाएं दाखिल हैं। डॉ नूतन इंदवर सहित 22 याचिकाओं पर सुनवाई की गई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामला सुना। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। जेएसएससी और जेपीएससी ने अपना पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने भी तर्क दिए। अदालत ने विस्तृत सुनवाई की। मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। अगली तारीख 1 अप्रैल तय की गई।
विवाद भर्ती विज्ञापन की शर्तों से जुड़ा हुआ है। आयोग ने जाति प्रमाण पत्र जमा करने की समय सीमा तय की थी। प्रमाण पत्र विशेष प्रारूप में देना जरूरी बताया गया था। कई उम्मीदवार समय सीमा के बाद दस्तावेज जमा कर सके। आयोग ने ऐसे उम्मीदवारों का कैंडिडेचर रद्द कर दिया। कुछ अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में स्थानांतरित किया गया। इससे उम्मीदवारों में असंतोष बढ़ा। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। अदालत अब नियमों की वैधता पर विचार कर रही है। मामले को संवेदनशील माना जा रहा है।
हाईकोर्ट पूर्ण पीठ के निर्णय के बाद सुनवाई आगे बढ़ा रहा है। तीन जजों द्वारा तय मुद्दों पर फैसला अहम रहेगा। जेएसएससी और जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और जयप्रकाश पेश हुए। याचिकाकर्ताओं की ओर से मनोज टंडन और अमृतांश वत्स ने पैरवी की। अदालत ने सभी दलीलें दर्ज कीं। अब अगली सुनवाई में आगे की बहस होगी। अभ्यर्थियों की उम्मीदें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। यह मामला भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। राज्यभर में इस पर चर्चा जारी है। अदालत का अंतिम आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



