बाहुबलियों के परिवार ने विधानसभा की जंग में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
पटना, बिहार: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में लंबे समय से चले आ रहे बाहुबलियों के प्रभाव को मुख्य धारा में ला दिया है।
इस चुनाव में कई बाहुबलियों की पत्नियों, बेटों और परिवार के अन्य सदस्यों ने मैदान संभाला है। यह परिदृश्य दर्शाता है कि अपराधी पृष्ठभूमि वाले नेताओं की राजनीतिक विरासत अभी भी राज्य में कितनी मजबूत है।
बाहुबली नेताओं के जेल में होने या चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध होने के कारण, उनके परिवारों ने उनकी जगह लेकर सत्ता की बागडोर संभालने का प्रयास किया है। ये परिवार सदस्य अपने प्रभावशाली नेताओं के नाम पर और उनके पारंपरिक वोट बैंक के सहारे चुनाव लड़ रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी ऐसे परिवारों को टिकट देकर जमीनी स्तर पर उनकी ताकत को मान्यता दी है।
हालांकि, कुछ राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बाहुबलियों के परिवारों का राजनीति में आना कोई नया रुझान नहीं है, लेकिन 2025 के चुनाव में उनकी उपस्थिति काफी बढ़ गई है। यह स्थिति बिहार की राजनीति के अपराधीकरण की गहन समस्या को फिर से रेखांकित करती है। इस दौरान, राजनीतिक पार्टियों को बाहुबलियों से दूरी बनाने के लिए नागरिक समाज से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।



