दोस्तों ल्युपस बीमारी इसको SLE भी बोलते !
इसको आसान हिंदी भाषा मे समझें!
ये बीमारी ऑटोइम्यून बीमारी है और ऑटोइम्यूनिटी को ऐसे समझें जैसे आपके घर का पालतू कुत्ते जो हमारी रक्षा करते दुश्मनों से और हमारी इशारों पर हरेक क्रिया कलाप करते लेकिन जब पागल होते तो सबसे पहले आप को ही काटता, वैसे ही हमारा इम्यून सिस्टम ( शरीर कि अवरोधी छमता) जो हमारे शरीर को संक्रमित करने वाले विषाणुओं ( बैक्टीरिया, वाइरस और परासाइट) से रक्षा तो करते लेकिन अगर किन्ही कारणों से डिस्टर्ब होते जैसे औद्योगिकीक प्रदूषण, वाइरस जैसे कोरोना, केमिकल एक्सपोज़र अल्ट्रावोइलेट कि किरणों से और जंक फूड और फास्ट फूड्स जिसमें केमिकल प्रिसर्वेटिव होते, तो गड़बड़ होकर आप ही के अंगों को ही बर्बाद करने लगते जैसे चेहरे मे तितली के आकार के लाल रंग धब्बे जिसे मैलर रैश कहते जिसे पता चलता कि आमुक व्यक्ति को ये बीमारी है, साथ मे बाल झड़ना, माँसपेस्शियों मे दर्द जोड़ों मे दर्द से लेकर खतरनाक रूप लेकर आपके मस्तिस्क, फेफड़े, आंत, किडनी को भी खराब करते और महिलाओं मे बार बार गर्भपात , इत्यादि!
ल्युपस मे हमारा शरीर का फाइगोसीटिक सिस्टम काम करना कम कर देता जिसको आसान भाषा मे नगर निगम कि सफाई कर्मचारी से तुलना कर सकते हैं, अगर नगर निगम कि सफाई कर्मचारी अगर मुहल्ले और नालियों कि सफाई करना बंद कर दें तो पुरा शहर गंदा हो जाता और लोगों का जीना मुहाल होता उसी प्रकार हमारे शरीर का फैगोसिसटिक सिस्टम अगर चेहरे मे अल्ट्रावोइलेट किरणों कि वजह से सन्बर्न ( मैलररैश) जिसमे हमारे शरीर का मृत ऊतकों कि सफाई नहीं होने से सोलर प्लेट मे ऊर्जा पैदा करने जैसे मृत उतकें इम्यून सिस्टम को नाना प्रकार के ऑटोएंटीबॉडी खासकर ANA,Anti ds DNA इत्यादि पैदा करने के लिए प्रेरित करते और यही ऑटोएंटीबॉडी हमारे शरीर के विभिन्न अंगों को कालांतर मे खराब करते चले जाते हैं और “सिष्टिमिक ल्युपस ” नामक खतरनाक बीमारी पैदा होता!
सोचिये अगर हम बीमारी कि शुरुआती लक्षण को जागरूकता द्वारा रोग लेते हैं जब सिर्फ मैलर रैश बनना शुरू होता, चेहरे को धूप से बचाकर जैसे सन् स्किन लोशन या हिजाब या टोपी और साडी का पल्लू या छतरी लगाकर तो हम इसकी खतरनाक चपेट से बच सकते हैं!
झारखंड रुमेटोलॉजी एसोसियेसन यही जागरूकता फैलाने के उदेश्य से आज ये कार्यकरम किया जिसमे इसके प्रेसिडेंट प्रो ( डॉ) आर के झा, संयुक्त सचिव डॉ बिंध्यचल गुप्ता और कुछ आदरणीय मरीज जैसे अंजलि बेदिया और सम्मी भकत भी शामिल हुए और लोगों को जागरूक किया, बहुतों ने इसपर सवाल किया और हमने सबका जवाब दिया ल्युपस के बारे मे!
डॉ देवनीस खेस, फाउंडर सचिव झारखंड रुमेटोलॉजी एसोसिएसन ( रजि) सह वरिष्ठ गठिया, वाय वात और ल्युपस रोग विशेषज्ञ!



