उच्चतम न्यायालय ने एक सरकारी अधिकारी को उसके द्वारा अदालत के आदेश की अवज्ञा करने पर कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसा कृत्य ‘बिना सजा के नहीं जा सकता’।
न्यायालय की यह टिप्पणी उच्च न्यायालय की खंडपीठ के एक आदेश के खिलाफ अधिकारी द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें अदालत की अवमानना की कार्रवाई के खिलाफ उसकी अपीलों को खारिज कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति [यहाँ न्यायाधीशों के नाम डालें यदि ज्ञात हों] की पीठ ने अधिकारी के आचरण पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि सरकारी अधिकारियों को अदालती आदेशों का सम्मान करना चाहिए और उनका पालन करना चाहिए। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि कानून के शासन को बनाए रखना सर्वोपरि है और किसी को भी अदालत के आदेशों की अवहेलना करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले में अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में कोई भी इस तरह का दुस्साहस न करे।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए एक तारीख तय की है और अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि उसके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। न्यायालय का यह सख्त रुख सरकारी अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश देता है कि अदालती आदेशों की अवज्ञा को हल्के में नहीं लिया जाएगा और इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।


