शीर्ष अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें जनवरी के एक आदेश की समीक्षा की मांग की गई थी। बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी को इस मामले की जांच सेबी से किसी विशेष जांच दल (SIT) को ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया था।
याचिकाकर्ता का दावा था कि सेबी निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएगी, इसलिए मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि सेबी एक सक्षम प्राधिकरण है और उसे जांच करने का पूरा अधिकार है।
न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा कि सेबी के आदेश में कोई त्रुटि नहीं दिखाई देती। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह सेबी की जांच में दखल नहीं देना चाहती।
गौरतलब है कि अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा अडानी ग्रुप पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया था। अडानी समूह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।
इस ताजा फैसले के साथ, यह स्पष्ट हो गया है कि सेबी ही अडानी-हिंडनबर्ग मामले की जांच करेगी। अब यह देखना होगा कि सेबी इस मामले की जांच किस तरह से आगे बढ़ाती है और कब तक अपनी रिपोर्ट पेश करती है।


