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बांग्लादेश के कार्यवाहक सरकार के प्रमुख की पीएम मोदी से मुलाकात पर संशय.

नई दिल्ली: बांग्लादेश के कार्यवाहक सरकार के प्रमुख मुहम्मद युनूस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच प्रस्तावित मुलाकात पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।

यह बैठक अप्रैल के पहले सप्ताह में बैंकॉक में होने वाले BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान होनी थी।

भारत की सतर्क प्रतिक्रिया
हालांकि, भारत ने अब तक युनूस सरकार के प्रति दूरी बनाए रखी है। इससे संकेत मिलता है कि भारत इस अंतरिम प्रशासन के साथ तत्काल जुड़ाव को लेकर सतर्क है।

युनूस का क्षेत्रीय सहयोग पर जोर
बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित करते हुए युनूस ने भारत, नेपाल और भूटान के साथ क्षेत्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

बांग्लादेश का सकारात्मक रुख
बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद जशिम उद्दीन ने कहा कि बांग्लादेश ने मोदी-युनूस बैठक के लिए पूरी तैयारी कर ली है। अब भारत के सकारात्मक जवाब का इंतजार किया जा रहा है।

भारत का सावधानी भरा रुख
भारत ने अभी तक इस बैठक को लेकर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में कोई नई जानकारी साझा करने के लिए उनके पास कुछ नहीं है।

बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता
अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बन गया।

हसीना सरकार के पतन के बाद स्थिति
हसीना को सत्ता से हटाने के बाद बांग्लादेश में उग्रवादी इस्लामी तत्वों का प्रभाव बढ़ गया, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में तेजी आई।

हसीना के खिलाफ वारंट
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने शेख हसीना और उनके सहयोगियों के प्रत्यर्पण का आदेश दिया है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव
शेख हसीना के भारत में शरण लेने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया है। हालांकि, दिसंबर 2024 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने ढाका का दौरा कर आपसी संबंधों पर चर्चा की थी।

विशेषज्ञों की राय
ढाका के पत्रकार सैफुर रहमान टपन ने कहा कि युनूस ने पहले भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की थी, लेकिन अब उनका रुख बदलता दिख रहा है।

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