शुक्रवार और शनिवार को हुई इस अप्रत्याशित मौसमीय घटना से सड़कों पर 5 से 10 इंच तक बर्फ की परत जम गई, जिससे आवागमन में कठिनाई हुई।
प्रमुख प्रभाव:
कृषि पर असर: ओलावृष्टि से मटर, हरी मिर्च, धनिया, गोभी और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों की फसलें बर्बाद हो गईं। विशेष रूप से हरी मिर्च की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है, जो इस क्षेत्र के किसानों की मुख्य आय का स्रोत है।
बाजार और यातायात बाधित: भारी ओलावृष्टि के कारण सड़कों पर बर्फ की मोटी परत जम गई, जिससे बाजार गतिविधियाँ और यातायात प्रभावित हुआ। लोग ओलावृष्टि के बाद भी सड़कों पर जमा बर्फ के कारण अपने वाहनों का उपयोग करने में असमर्थ रहे।
आवासीय क्षति: तेज हवा और ओलावृष्टि के कारण कई मकानों के छप्पर टूट गए, जिससे लोगों को आश्रय संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग की चेतावनी:
मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। लोगों को सावधानी बरतने और आवश्यकतानुसार ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया:
जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा देने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। साथ ही, प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
निष्कर्ष: लोहरदगा में हुई इस अप्रत्याशित ओलावृष्टि ने न केवल किसानों की आजीविका पर असर डाला है, बल्कि सामान्य जनजीवन को भी बाधित किया है। प्रशासन और स्थानीय समुदाय को मिलकर इस आपदा से उबरने के लिए तत्परता से कार्य करना होगा।


