संबलपुर के दंपति ने होली के लिए प्राकृतिक रंग तैयार किए.
संबलपुर (ओडिशा): ओडिशा के संबलपुर में एक दंपति ने होली के लिए पारंपरिक तरीके से प्राकृतिक रंग तैयार किए हैं।
हर साल की तरह इस बार भी उन्होंने पलाश के फूलों से खूबसूरत नारंगी रंग बनाया, लेकिन खास बात यह है कि इस बार उन्होंने पीले रंग का भी निर्माण किया है।
मुख्य बिंदु:
संबलपुर के इस दंपति का उद्देश्य प्राकृतिक और केमिकल-फ्री रंगों को बढ़ावा देना है।
उन्होंने पलाश के फूलों का उपयोग कर नारंगी और पीला रंग तैयार किया है।
पलाश के फूलों को सुखाकर और उबालकर इन रंगों का निर्माण किया गया।
नारंगी रंग के लिए फूलों को सीधे उबाला गया, जबकि पीले रंग के लिए उसमें हल्दी मिलाई गई।
इन प्राकृतिक रंगों का उपयोग त्वचा के लिए सुरक्षित होता है।
दंपति ने कहा कि पलाश के फूलों में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो त्वचा संक्रमण से बचाते हैं।
ये रंग न केवल होली के लिए, बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य आयोजनों के लिए भी उपयुक्त हैं।
संबलपुर क्षेत्र के कई लोग इन रंगों को अपनाकर केमिकल युक्त रंगों से बच रहे हैं।
दंपति ने लोगों को प्राकृतिक रंगों को अपनाने का संदेश दिया है।
इन रंगों को बनाने में पानी की खपत भी कम होती है।
क्षेत्र के लोग इन रंगों की तारीफ कर रहे हैं।
दंपति का कहना है कि ऐसे रंग घर में भी आसानी से बनाए जा सकते हैं।
स्थानीय बाजार में इन प्राकृतिक रंगों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
दंपति ने होली के मौके पर मुफ्त में रंग बांटने का भी फैसला किया है।
लोगों का कहना है कि इन रंगों से होली खेलने में त्वचा को कोई नुकसान नहीं होता।
संबलपुर में इस दंपति का प्रयास चर्चा का विषय बन गया है।
इस प्रयास से पलाश के फूलों का संरक्षण भी बढ़ेगा।
दंपति का उद्देश्य पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाना है।
क्षेत्र के लोग होली के लिए अब प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
दंपति ने अन्य लोगों से भी रासायनिक रंगों की जगह प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने की अपील की है।


