जयपुर, राजस्थान: जयपुर में शताब्दियों से चली आ रही आतिशबाजी निर्माण की पारंपरिक कला अपने अस्तित्व के अंतिम पड़ाव पर खड़ी है। आधुनिक प्रतिस्पर्धा, कठोर सरकारी नियमों और चाइनीज फटाखों की बढ़ती मांग के कारण, इस कला को जीवित रखने वाला शोर्गार समुदाय गहरे संकट में है। समुदाय के कारीगर अब अपने पारंपरिक व्यवसाय को बचाने और अपनी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए सरकार से तत्काल मदद की गुहार लगा रहे हैं।
शोर्गार समुदाय पीढ़ी दर पीढ़ी हाथों से बेहतरीन और सुरक्षित आतिशबाजी बनाने के लिए जाना जाता है। उनके द्वारा बनाए गए फटाखे अपनी अद्वितीय ध्वनि और रंगों के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन कम लागत और बड़ी मात्रा में उत्पादन करने वाले कारखानों के सामने ये कारीगर टिक नहीं पा रहे हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण संबंधी कड़े कानूनों ने उनके कामकाज को और भी मुश्किल बना दिया है। कई परिवार अब इस पैतृक व्यवसाय को छोड़ने और अन्य कामों की तलाश करने को मजबूर हो गए हैं, जिससे एक अमूल्य पारंपरिक कला के विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।
समुदाय के प्रतिनिधियों ने स्थानीय प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें फंडिंग, कच्चे माल पर सब्सिडी और सुरक्षित उत्पादन क्षेत्र (सेफ मैन्युफैक्चरिंग जोन) स्थापित करने की मांग की गई है। उनकी मांग है कि सरकार इस कला को संरक्षण देकर कारीगरों को प्रशिक्षण और आधुनिक बाजारों तक पहुँचने में मदद करे। जयपुर की सांस्कृतिक विरासत के हिस्से के रूप में इस कला को बचाने के लिए सरकारी हस्तक्षेप समय की मांग है, ताकि आगामी पीढ़ियाँ भी इस पारंपरिक हुनर का चमत्कार देख सकें।


