आइए जानते हैं कि आखिर कांग्रेस क्यों पिछड़ गई और बीजेपी ने कैसे बढ़त बनाई।
बीजेपी ने बेरोज़गारी के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि हुड्डा सरकार के 10 साल के शासनकाल में नौकरियां भ्रष्टाचार और ‘खरी-स्लिप’ के आधार पर दी जाती थीं, जिसे बीजेपी सरकार ने रोक दिया।
कांग्रेस में अंदरूनी कलह भी हार का कारण बनी। भूपेंद्र हुड्डा, उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा, और कुमारी शैलजा के बीच मुख्यमंत्री पद की रेस चली। इस खींचतान ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया।
बीजेपी ने किसान आंदोलन से जुड़ी नाराज़गी को चुनाव से पहले ठंडा किया। राज्य में 24 फसलों पर एमएसपी लागू कर बीजेपी ने किसानों को राहत दी।
अग्निवीर योजना पर कांग्रेस के हमलों का बीजेपी ने जवाब दिया और अमित शाह ने अग्निवीरों को नौकरी की गारंटी दी, जिससे कांग्रेस बैकफुट पर आ गई।
कांग्रेस के वोटबैंक में बंटवारा भी उसकी हार का कारण बना। आईएनएलडी, एचएलपी, आम आदमी पार्टी, जेजेपी और निर्दलीयों ने कांग्रेस के वोट छीन लिए।
मोदी मैजिक का असर भी चुनावों में दिखा। पीएम मोदी, अमित शाह और अन्य बीजेपी नेताओं ने हरियाणा में जोरदार रैलियां कीं और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला।



