
मोटी पगड़ी, मूछों पर ताव, गन कल्चर, सोशल मीडिया पर भर-भर के हेट स्पीच और बाजू पर कट्टरपंथी जरनैल सिंह भिंडरावाले का टैटू। ये है पटियाला सिख-हिंदू हिंसा मामले में मास्टरमाइंड बताए जा रहे बरजिंदर परवाना का छोटा सा परिचय।
पंजाब के पटियाला शहर में 29 अप्रैल, शुक्रवार को काली माता मंदिर के सामने हिंदुओं और सिखों के बीच जमकर हिंसा, पत्थरबाजी और मारपीट हुई। परवाना 24 अप्रैल से ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए 29 अप्रैल के लिए खास तैयारी रखने की बात करके लोगों को भड़का रहा था।
पंजाब पुलिस और इंटेलिजेंस ने समय रहते एक्शन क्यों नहीं लिया
आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने 15 अप्रैल को ही ऐलान कर दिया था कि 29 अप्रैल को खालिस्तान घोषणा दिवस मनाया जाएगा। इसी के विरोध में 16 अप्रैल को शिवसेना नेता हरीश सिंगला ने ऐलान कर दिया कि वो 29 अप्रैल को खालिस्तान विरोधी रैली निकालेंगे और पुतला फूंकेंगे।
परवाना और बाकी कुछ कट्टरपंथियों को ये बात नहीं पची और उन्होंने एक हफ्ते पहले से ही शिवसेना की रैली के खिलाफ प्लानिंग शुरू कर दी।
साफ है कि करीब दो हफ्ते पहले से ही 29 अप्रैल की हिंसा की स्क्रिप्ट लिखी जानी शुरू हो चुकी थी, लेकिन पंजाब पुलिस और इंटेलिजेंस ने वक्त रहते पुख्ता कदम नहीं उठाए।
दैनिक भास्कर ने पटियाला में हिंसा वाली जगह जाकर पड़ताल की और परत-दर-परत इस पूरे मामले की तह तक पहुंचे। पहले हम खंडा चौक स्थित श्री दुखनिवारण गुरुद्वारे गए और फिर काली माता मंदिर पहुंचे जहां पूरी हिंसा की वारदात घटी।
बरजिंदर परवाना ने 25 अप्रैल के अपने एक इंस्टाग्राम रील में पंजाबी में कहा, ‘29 तारीख की तैयारी रखियो खालसा जी। आपको 26 तारीख को प्लान की जानकारी दे देंगे।
हमें SSP पर भरोसा है कि वो रैली नहीं निकलने देंगे, लेकिन हम चुप नहीं रहेंगे, हमें दुखनिवारण गुरुद्वारे पर इकट्ठा होना है। बंदर (शिवसेना वाले) आएंगे, हम उनको भगा के आएंगे और उनकी पूंछ काटकर आएंगे।’
खंडा चौक पर गुरुद्वारे के सामने तलवारों के साथ जुट गए सैकड़ों सिख
खंडा चौक स्थित दुखनिवारण गुरुद्वारा, काली माता मंदिर से सिर्फ 1 किलोमीटर की दूरी पर है। चौक के सामने ही काम करने वाले हिंदू मजदूरों ने नाम ना जाहिर करने की शर्त पर बताया कि खंडा चौक पर सुबह 9-10 बजे के आस-पास गुरुद्वारे के आसपास सिख लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। सैकड़ों लोग तलवारें, कटारें लेकर खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।
स्थानीयों ने बताया कि भीड़ में शामिल कुछ लोग बाहर से भी आए थे, लेकिन ज्यादातर लोग स्थानीय थे। खंडा चौक के आसपास का इलाका सिख बहुल है। वहीं काली माता मंदिर के आसपास हिंदू ज्यादा रहते हैं।
13 दिन पहले ही शिवसेना ने खालिस्तान के विरोध में रैली का किया था ऐलान
एक तरफ सिख कट्टरपंथी जुटना शुरू हो चुके थे और माहौल उग्र हो रहा था। दूसरी तरफ शिवसेना के हरीश सिंगला बिना पुलिस अनुमति के खालिस्तान विरोधी मार्च निकालने की तैयारी में थे। शिवसेना नेता और हिंसा के आरोपी हरीश सिंगला के बेटे कोमल सिंगला ने बताया कि ‘हमें 15 अप्रैल को सिख फॉर जस्टिस के वॉन्टेड गुरुपवंत सिंह पन्नू का लेटर मिला।
इस लेटर में लिखा था कि 29 अप्रैल को खालिस्तान घोषणा दिवस मनाया जाए और खालिस्तान जिंदाबाद के साथ मार्च निकाला जाए। हरीश सिंगला जी ने 16 अप्रैल को ऐलान किया कि 29 अप्रैल को पटियाला में ‘खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च’ निकाला जाएगा। प्रशासन ने रोका कि इस तरह का मार्च ना निकाला जाए। लेकिन हरीश सिंगला का तर्क ये था कि खालिस्तान मुर्दाबाद कहने में क्या अपराध है? इसका हमें कोई जवाब नहीं दिया गया।’
सिख कट्टरपंथियों ने मंदिर पर हमला क्यों किया, ये समझ से परे: कोमल सिंगला
29 मार्च को सुबह 10 बजे के करीब आर्य समाज चौक पर पूरे राज्य से करीब 2 हजार लोग खालिस्तान विरोधी मार्च में शामिल होने के लिए आए। दोपहर करीब 1 बजे मार्च सिर्फ 50 मीटर तक आगे बढ़ा। इस मार्च में खालिस्तान मुर्दाबाद और गुरुपवंत सिंह पन्नू का पुतला जलाया गया।
दूसरी तरफ से कई सिख कट्टरपंथी भी आए] लेकिन वहां कोई झड़प नहीं हुई। वहीं इस घटना के पहले ही सिख कट्टरपंथी काली माता मंदिर पर हमला कर चुके थे और हिंसा शुरू हो चुकी थी।
हरीश सिंगला के बेटे ने बताया कि खालिस्तान विरोधी उनकी रैली के रूट में काली माता मंदिर आना ही नहीं था, इसलिए ये समझ से परे है कि सिख कट्टरपंथियों ने काली माता मंदिर पर धावा क्यों बोल दिया?
पत्थरबाजी इतनी तगड़ी थी कि मंदिर की दुकानों के शेड में छेद हो गए
हिंसा के दो दिन बाद भी काली माता मंदिर के दोनों तरफ के रास्तों पर पुलिस की पुख्ता बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा में पुलिसवालों को भी बड़ी तादाद में तैनात किया गया है। मंदिर के सामने फुटओवर पाथ पर जब हमने चढ़कर देखा तो पाया कि मंदिर के शेड और छतों पर कई सारे ईंट-पत्थर पड़े हुए थे। वहीं मंदिर की दुकानों के प्लास्टिक के शेड में पत्थरों की बरसात की वजह से छेद हो चुके थे।
रैली नहीं मंदिर था टारगेट!
काली माता मंदिर के बाहर प्रसाद की दुकान लगाने वाले लकी बताते हैं, ‘29 अप्रैल को दोपहर करीब 12 बजे एकदम से कई सारे निहंग सिख तलवार, कृपाण और बंदूक लेकर आए और मारधाड़ शुरू कर दी। मेरे पड़ोस वाली दुकान में घुसकर तलवारें भी भांजी गईं, खुशकिस्मती रही कि कोई बुरी तरह जख्मी नहीं हुआ। कई सारे दुकानों में सामान को नुकसान पहुंचाया गया।’
हिंदू शिक्षा समिति के मणि मंदिर कमेटी में सदस्य भी हैं। मणि बताते हैं कि शिवसेना वाले जो खालिस्तान विरोधी रैली निकाल रहे थे उनका रूट नेहरू पार्क से आर्य समाज चौक जाने का था, लेकिन सिख कट्टरपंथी उस रैली को टारगेट करने की बजाय सीधे काली माता मंदिर के सामने आकर हमला करने लगे।
कट्टरपंथी मंदिर में घुसकर बेअदबी करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हम लोगों ने उनको मुंहतोड़ जवाब देकर भगाने की कोशिश की। इसके बाद सिखों की तादाद बढ़ती गई। साफ है कि बिना प्लानिंग के मंदिर पर इस तरह से हमला नहीं हो सकता है।
मणि बताते है कि ‘पुलिस को इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि काली माता मंदिर पर हमला होने वाला है। लेकिन पुलिस ने जो स्थितियां बनी उसे काबू में करने की कोशिश की लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा हो चुकी थी कि स्थितियां पुलिस के भी काबू में नहीं रहीं।’
हिंसा मामले में अब तक 9 गिरफ्तार
पंजाब पुलिस की स्पेशल 20 टीमें पूरे राज्य में छापे मार रही है पिछले 24 घंटे में पुलिस ने हिंसा के मास्टरमाइंड बरजिंदर परवाना समेत 6 और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पटियाला में IG मुखविंदर सिंह छीना ने बताया कि इनमें 3 सिख कट्टरपंथी, शिवसेना नेता हरीश सिंगला का साथी शंकर भारद्वाज भी शामिल है।
सोशल मीडिया पर हेट स्पीच देने के मामले में गग्गी पंडित को भी पुलिस ने केस दर्ज कर अरेस्ट कर लिया है। इस मामले में हरीश सिंगला और दो सिख कट्टरपंथी समेत 3 लोग पहले ही पकड़े जा चुके हैं। गिरफ्तार लोगों की संख्या अब 9 हो चुकी है।
पुलिस ने परवाना को पटियाला कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जिसमें पुलिस उससे सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू से कनेक्शन पर भी उससे जवाब उगलवाएगी।
Source : Dainik Bhaskar


