सिर्फ ₹1 के फेर में फंसकर डूब गई जेट एयरवेज, नरेश गोयल ने खुद लिख दी अपनी कंपनी की बर्बादी की कहानी
कारोबार या बिजनेस हमेशा से असंभावनाओं से घिरा रहता है। कब कौन का फैसला कारोबार पर हावी हो जाए पता नहीं। कई बार फैसले सटीक बैठ जाते हैं तो कभी एक फैसला पूरे कारोबार को बर्बाद कर देता है। जेट एयरवेज (Jet Airways) के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। अपने एक फैसले से जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल (Naresh Goyal) ने अपनी कंपनी की बर्बादी की कहानी खुद अपने हाथों से लिख दी। नरेश गोयल (Naresh Goyal) एक बार फिर से खबरों में हैं। बीते हफ्ते प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें केनरा बैंक से 538 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है। ईडी ने नरेश गोयल के ठिकानों पर छापेमारी की। उनके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए। आज उसी जेट एयरवेज की कहानी जानते हैं , जिसने कभी हमें कम कीमत पर हवाई यात्रा का लुत्फ दिया था। कैसे जेट एयरवेज की बर्बादी की कहानी शुरू हुई और कैसे एक एयरलाइन अपने ही फाउंडर की गलतियों से डूब गई?
1 रुपए की लड़ाई में बर्बाद हुई एयरलाइन

जेट एयरवेज की बर्बादी की कहानी की शुरुआत सिर्फ एक रुपये से हुई। कभी 300 रुपये महीने की सैलरी पाने वाले जिस नरेश गोयल ने जेट एयरवेज एयरलाइन (Jet Airways Airlines) की शुरुआत की, खुद की गलती से उसे डूबो भी दिया। जेट एयरवेज की बर्बादी की कहानी साल 2015 से शुरू हुई। देश की सबसे पुरानी निजी एयरलाइंस में से एक जेट एयरवेज ने अपने प्रतिद्वंदी एयरलाइन इंडिगो (Indigo) से मुकाबला करने के लिए एक ऐसा फैसला लिया, जो कंपनी पर भारी पड़ गया।
कर्ज के फेर में फंस गई कंपनी




