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हमारी एक आंख फोड़ी तो वो दोनों आंख गंवा देगा! भारत को निवेश पर झटका देने में कनाडा की मुश्किल समझिए

भारत और कनाडा के बीच बीते कुछ दिनों से तनातनी चल रही है। दोनों देशों के बीच खालिस्तान के मुद्दे पर कूटनीतिक तनाव बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच बाजार से लेकर व्यापार तक का रिश्ता है। कनाडा की कंपनियों का भारत में निवेश है तो वहीं भारतीय कंपनियों ने कनाडा में भारी भरकम निवेश किया है। कनाडा और भारत के बीच अगर संबंध बिगड़ते हैं तो व्यापार पर असर होगा। हालांकि जिस तरह से कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के शब्द बदले हैं, उससे लगने लगा है कि उन्हें अपनी भूल का अहसास हो गया है। भारत से गतिरोध के बीच ट्रूडो ने कहा कि कनाडा अभी भी भारत के साथ धनिष्ठ संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। बीते कुछ दिनों से कनाडा विवाद का असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है। हालांकि इस तनाव का असर कनाडा के निवेश पर नहीं हुआ है। सितंबर महीने में भारतीय बाजार से निवेशकों से मोटा पैसा निकाला, लेकिन अच्छी बात ये रही है इसमें कनाडा का निवेश नहीं है।

कनाडा नहीं निकाल रहा पैसा​

​कनाडा नहीं निकाल रहा पैसा​

भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ रहा है। खालिस्तान के मुद्दे पर भारत और कनाडा के संबंधों में दरार आ रही है। कनाडा के साथ बिगड़ते संबंधों का असर स्टॉक मार्केट पर तो दिख रहा है, लेकिन खास बात ये है कि इससे कनाडा का भारत में निवेश प्रभावित नहीं हुआ है। सितंबर महीने में भारत से 12000 करोड़ रुपये की निकासी हुई, लेकिन इस निकासी में कनाडा का आउटफ्लो नहीं मिला है। दरअसल अमेरिकी फेडरल की टिप्पणियों के बाद से भारतीय बाजार से 12 हजार करोड़ रुपये निकल गए, लेकिन इसमें कनाडाई कंपनियों की हिस्सेदारी के संकेत नहीं है। कनाडा की कंपनियों का निवेश भारतीय बाजार में बना हुआ है। जिसकी वजह भी है। कनाडा चाहकर भी इतनी आसानी से भारतीय बाजार से अपने हाथ नहीं खींच सकता है। इंडियन स्टॉक एक्सचेंज के पास मौजूद ब्लॉक डील के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बाजार से जो निकासी हुई है, उसमें कनाडा से जुड़ी कोई बिक्री नहीं है।

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