रांची में महिला सुपरवाइजर नियुक्ति से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। यह सुनवाई झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी की ओर से दायर अपील पर हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जनवरी 2028 की तारीख तय की। खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर लगाई गई रोक को भी बरकरार रखा। जेएसएससी की तरफ से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा। उनके साथ अधिवक्ता जयप्रकाश भी अदालत में उपस्थित रहे। प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। आयोग ने न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी है। यह आदेश आकांक्षा कुमारी और अन्य की याचिका पर 15 मई 2026 को पारित हुआ था। मामले की सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े नियमों पर सवाल उठे। विवाद अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनकी उम्मीदवारी रद्द किए जाने से जुड़ा है। जेएसएससी ने दस्तावेजों की जांच में त्रुटियां बताते हुए कुछ अभ्यर्थियों को अयोग्य करार दिया था। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की एकल पीठ का दरवाजा खटखटाया। एकल पीठ ने आयोग के फैसले को निरस्त करते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था।
प्रार्थियों के अनुसार, महिला सुपरवाइजर के 444 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। उनका कहना था कि विज्ञापन में तीन विषयों में ऑनर्स डिग्री की अनिवार्यता स्पष्ट नहीं थी। इन विषयों में सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी और होम साइंस शामिल थे। प्रार्थियों ने अदालत को बताया कि नियुक्ति के लिए इन विषयों के साथ स्नातक होना आवश्यक था। उन्होंने इन तीनों विषयों के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि, उनके पास इन विषयों में तीन वर्षीय ऑनर्स डिग्री नहीं थी। अभ्यर्थियों का तर्क था कि उन्होंने स्नातक स्तर पर संबंधित विषयों की पढ़ाई की है। उनके अनुसार, इन विषयों का अध्ययन दो वर्षों तक किया गया था। इसलिए केवल ऑनर्स डिग्री नहीं होने के आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद्द करना उचित नहीं था। एकल पीठ ने प्रार्थियों की दलीलों पर विचार करते हुए आयोग के आदेश को रद्द कर दिया था। अदालत ने जेएसएससी को प्रभावित अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था। इसी फैसले के खिलाफ आयोग ने खंडपीठ में अपील दायर की। अब खंडपीठ मामले में आगे की सुनवाई करेगी। अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किए जाने की संभावना है। फिलहाल, एकल पीठ के आदेश पर लगी रोक बरकरार है। मामले का अंतिम परिणाम भर्ती प्रक्रिया पर असर डाल सकता है। अभ्यर्थियों की पात्रता और नियुक्ति नियमों की व्याख्या इस विवाद के प्रमुख मुद्दे हैं। हाईकोर्ट के अगले आदेश पर संबंधित अभ्यर्थियों की आगे की स्थिति निर्भर करेगी।


