रांची में राज्य सरकार ने 153 निजी कॉलेजों में डिप्लोमा इन फार्मेसी की परीक्षा आयोजित करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही फार्मेसी काउंसिल को फार्मासिस्टों का रजिस्ट्रेशन करने से भी रोक दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। यह प्रतिबंध अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। सरकार के इस फैसले के पीछे फार्मेसी काउंसिल में चल रहा कानूनी विवाद मुख्य कारण बताया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने हाईकोर्ट में दायर मामलों से जुड़े आदेशों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया है। विभाग के संयुक्त सचिव अनुज कुमार प्रसाद के हस्ताक्षर से जारी आदेश में पूरे मामले का उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार, फार्मेसी काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार सह सचिव प्रशांत पांडेय के खिलाफ गंभीर शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों की समीक्षा के बाद सरकार ने उन्हें पद से हटाने का आदेश जारी किया था। उन्हें पद से हटाने का आदेश 17 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। इसके बाद प्रशांत पांडेय ने सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी। यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। इस विवाद के कारण फार्मेसी काउंसिल के कामकाज पर भी असर पड़ा है। अदालत ने इस मामले में 20 अगस्त 2026 को आदेश पारित किया था। सरकार ने उसी आदेश के आलोक में परीक्षा और रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
स्वास्थ्य विभाग ने डिप्लोमा इन फार्मेसी परीक्षा समिति को विशेष निर्देश जारी किए हैं। समिति को कहा गया है कि सरकार की अनुमति के बिना कोई परीक्षा आयोजित नहीं की जाए। यह निर्देश अगले सरकारी आदेश तक लागू रहेगा। विभाग ने फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष और सदस्यों को भी आदेश का पालन करने को कहा है। उन्हें सरकार के निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। इसके साथ ही की गई कार्रवाई की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह रोक अदालत के अगले आदेश या स्पष्ट निर्देश आने तक जारी रहेगी। इसलिए फिलहाल संबंधित निजी कॉलेजों में डिप्लोमा इन फार्मेसी की परीक्षाएं नहीं हो सकेंगी। फार्मासिस्टों के नए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी प्रभावित रहेगी। इस फैसले से राज्य के 153 निजी फार्मेसी कॉलेजों के विद्यार्थी और संबंधित अभ्यर्थी प्रभावित हो सकते हैं। आगे की स्थिति न्यायालय के आदेश और सरकार के अगले निर्देश पर निर्भर करेगी।



