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महिला आरक्षण बिल पर नीतीश ने क्यों दिया मोदी का साथ? RJD नेताओं के होश इसलिए उड़े!

बिहार के सीएम नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन में अगर पाला बदल के आरोपों को दरकिनार कर दें तो कई खूबियां साफ-साफ दिखाई देती हैं। नीतीश की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि वे चाहे जिस खेमे या गठबंधन का हिस्सा रहें, वाजिब और जरूरी मुद्दों पर काम करने वालों के साथ खड़े दिखते हैं। देश में गुजरात के विकास मॉडल की खूब चर्चा होती रही है। भाजपा ने देश भर में गुजरात के विकास मॉडल को खूब प्रचारित किया। यह काफी हद तक सही भी है, लेकिन बिहार के सीएम रहते नीतीश कुमार ने विकास और राजनीति में कई ऐसे प्रयोग किए हैं, जिनको सही ढंग से प्रचारित किया जाए तो गुजरात से अधिक मार्क्स बिहार को मिलेंगे। हां, यहां यह भी ध्यान रखना होगा कि बिहार की हालत गुजरात जैसी नहीं रही है। गुजरात के मुकाबले बिहार गरीब राज्य है।

महिला आरक्षण बिल के खिलाफ थे लालू, मुलायम और शरद

लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के 15 साल के कार्यकाल को अगर किनारे कर दें तो बाद के 15 सालों में नीतीश ने बिहार को जिस मुकाम पर पहुंचाया है, कोई बाधा नहीं आई तो वहां से निरंतर आगे बढ़ने के ही रास्ते खुलते हैं। यहां यह बताना प्रासंगिक है कि नीतीश कुमार ने अपने शासन के डेढ़ दशक भाजपा के साथ ही बिताए हैं। यानी नीतीश के विकास मॉडल में भाजपा भी बराबर की हिस्सेदार रही है। केंद्र की एनडीए सरकार में मंत्री रहने से लेकर बिहार का सीएम बनने तक भाजपा ने ही नीतीश का साथ दिया है। हालांकि इधर बीच में महिला आरक्षण बिल को लेकर नीतीश ने लालू की एक बात में सुर मिलाया है कि आरक्षण के अंदर भी आरक्षण होना चाहिए। लेकिन कुल मिलाकर समझिए तो मोदी सरकार को इस बिल पर नीतीश ने समर्थन तो दे ही दिया है।

आरजेडी के विरोध के बावजूद JDU का महिला आरक्षण बिल का समर्थन

नीतीश की यही खासियत उन्हें दूसरों से अलग करती है। उनके साथ कौन है, फैसले लेने में नीतीश कभी इसकी परवाह नहीं करते। नीतीश सरकार में फिलवक्त सहयोगी आरजेडी की नाराजगी या विरोध की परवाह किए बगैर नीतीश ने 27 साल से लटके महिला आरक्षण बिल को पास कराने में बिना शर्त सरकार का साथ देने का साहसिक कदम उठाया। यह अलग बात है कि बिल का विरोध करते रहे लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी का कोई सदस्य फिलहाल लोकसभा में नहीं है। शायद यही वजह है कि नीतीश के इस दांव ने RJD नेताओं के होश उड़ा दिए। क्योंकि लोकसभा में उनकी पार्टी का कोई सदस्य तो है नहीं कि वो वहां अपनी आवाज बुलंद कर दें।

नीतीश ने महिला आरक्षण बिल के पेश होने पर खुशी जताई

नीतीश ने बिल पेश होते ही अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद में जो महिला आरक्षण बिल पेश किया गया है, वह सरकार का स्वागत योग्य कदम है। नीतीश शुरू से ही महिला सशक्तीकरण के हिमायती रहे हैं और बिहार में उन्होंने इस दिशा में कई ऐतिहासिक कदम भी उठाये हैं। वैसे भी महिला आरक्षण बिल का जब शरद यादव (दिवंगत), लालू यादव और मुलायम सिंह जैसे समाजवादी नेता जब-जब विरोध किया, नीतीश कुमार तब-तब बिल के समर्थन में सरकारों के साथ खड़े रहे। जब यब बिल विरोध के कारण लोकसभा से पास नहीं हुआ तो नीतीश ने बिहार में इस तरह का प्रयोग कर दिखाया। नीतीश ने वर्ष 2006 से पंचायती राज संस्थाओं और वर्ष 2007 से नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। ऐसा तब हुआ, जब किसी भी राज्य ने इसकी कल्पना भी नहीं की थी। यानी इस मामले में नीतीश ने सबको मात दे दिया।

नौकरियों में भी नीतीश ने महिलाओं को 50% आरक्षण दिया

वर्ष 2006 से ही नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार में प्रारंभिक शिक्षकों की नियुक्ति में महिलाओं को 50 प्रतिशत और वर्ष 2016 से सभी सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया है। साल 2013 से बिहार पुलिस में भी महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है। बिहार पुलिस में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी देश में अभी सर्वाधिक है। इतना ही नहीं, बिहार में मेडिकल और इंजीनियरिंग में नामांकन में न्यूनतम 33 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिये आरक्षित की गई हैं। ऐसा करनेवाला बिहार देश का पहला राज्य है।

महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन भी 2006 में किया गया

नीतीश कुमार का फोकस महिलाओं पर अधिक रहा है। भले ही इसके पीछे नीतीश कुमार की कोई सियासी मंशा रही हो। नीतीश सरकार ने वर्ष 2006 में राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन के लिए परियोजना शुरू की थी। इसका नामकरण ‘जीविका‘ किया। केंद्र सरकार को भी यह योजना पसंद आई और तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसी तर्ज पर महिलाओं के लिए आजीविका कार्यक्रम चलाया। बिहार में अब तक 10 लाख 47 हजार स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है, जिनमें अभी एक करोड़ 30 लाख से भी अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसी महिलाओं को बिहार में जीविका दीदी कहा जाता है।

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