कोर्ट ने यह फैसला एक महिला द्वारा दायर की गई एफआईआर के आधार पर सुनाया है, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके पति ने बिना उसकी सहमति के उनके अंतरंग पलों का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवाह एक साझेदारी है, न कि एक स्वामित्व। पति अपनी पत्नी के शरीर पर कोई अधिकार नहीं जता सकता है। पत्नी का शरीर उसका अपना है और वह अपनी पसंद के अनुसार अपने शरीर के बारे में फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है।
कोर्ट ने कहा कि पति द्वारा पत्नी की निजी तस्वीरें या वीडियो बिना उसकी अनुमति के साझा करना एक गंभीर अपराध है। इस तरह के कृत्य से महिला की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है।
यह फैसला महिलाओं के अधिकारों के लिए एक बड़ी जीत है। इससे महिलाओं को यह संदेश जाता है कि वे अपने शरीर और निजता के बारे में स्वतंत्र हैं और उन्हें किसी भी तरह के शोषण को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए।



