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कौन है बूचा का कसाई: पुतिन का वो जनरल जिसे सौंपी गई थी कीव पर कब्जे की जिम्मेदारी, अब आम लोगों के नरसंहार के लगे आरोप

रूस की ओर से यूक्रेन के खिलाफ शुरू की गई जंग में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। हालांकि, इसमें सबसे चौंकाने वाला घटनाक्रम कीव से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित बूचा नाम के छोटे से शहर से आया है। यूक्रेन की सरकार और सेना ने खुलासा किया है कि बूचा में रूसी सैनिकों ने मासूम लोगों का नरसंहार किया। इनमें बुजुर्गों से लेकर छोटे बच्चे तक शामिल रहे। हालांकि, रूस का कहना है कि उसने यूक्रेन में ऐसे किसी भी जनसंहार में हिस्सा नहीं लिया। रूस के इन्हीं दावों को यूक्रेन ने खारिज करते हुए उस रूसी कमांडर का नाम भी सामने रखा है, जिसने बूचा में आम लोगों की हत्याओं में हिस्सा लिया।किस पर है बूचा में नरसंहार के आरोप?रूस के जिस कमांडर को ‘बूचा का कसाई’ (बुचर ऑफ बूचा) कहा जा रहा है, उसका नाम लेफ्टिनेंट कर्नल अजात्बेक ओमुरबेकोव बताया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह 64वीं मोटरराइफल ब्रिगेड का कमांडर है, जिसे बूचा पर कब्जे की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि पिछले हफ्ते बूचा से लौटने से पहले ओमुरबेकोव के निर्देश पर ही रूसी सैनिकों ने यूक्रेन के आम लोगों के हाथ पीछे बांधे और एक-एक कर उन्हें गोली मार दी। ओमुरबेकोव की उम्र 40 साल बताई गई है। 2014 में उसे रूस में तत्कालीन उप रक्षामंत्री ने विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया था। रूसी सेना की गतिविधियों पर नजर रखने वाले यूक्रेन के स्वयंसेवक उपक्रम इन्फॉर्मनेपाल्म के मुताबिक, ओमुरबेकोव रूसी सेना का टॉप कमांडर है और उसे पिछले नवंबर, 2021 में ही रूस की ऑर्थोडॉक्स चर्च के पादरियों से मिलते देखा गया था। इसके बाद उसे यूक्रेन से लगी सीमाओं पर तैनात किया गया। अपने एक संबोधन में ओमुरबेकोव ने कहा था कि अगर हम कोई भी लड़ाई अपनी आत्मा की ताकत से लड़ते हैं तो युद्ध में हथियार बेकार हो जाते हैं। 

अब कहां है ओमुरबेकोव?यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, बूचा में नरसंहार को अंजाम देने वाली सैन्य टुकड़ी बेलारूस भाग चुकी है। यूक्रेन के रक्षा मंत्री ने कहा कि ओमुरबेकोव की बटालियन 30 मार्च को ही बूचा से भाग गई थी। हालांकि, अब इस टुकड़ी के पश्चिमी रूस के बेलगोरोद भेजे जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि ओमुरबेकोव को आगे खारकीव जैसे इलाकों में भेजकर युद्ध को आगे भड़काया जा सकता है। 

बूचा में जो हुआ उस पर यूक्रेन का क्या कहना है?यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की एक फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है, जिन्हें बूचा नरसंहार के बाद लिया गया था। इनमें जेलेंस्की के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। यूक्रेन ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में कहा कि रूस अब यूक्रेन में नरसंहार पर उतर आया है। उन्होंने मॉस्को की सेना की साजिश को इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठन से भी खतरनाक बताया और परिषद से मामले में न्याय की अपील की। यूक्रेन ने बूचा नरसंहार की कई फोटोज और वीडियोज भी सामने रखे हैं। जेलेंस्की का कहना है कि कई लोगों के हाथ पीछे बांधकर उनके सिर पर गोली मार दी गई, जबकि कईयों को तड़पाकर उन्हें ग्रेनेड से उड़ा दिया गया। इसके अलावा कार से भागने की कोशिश कर रहे कुछ को तो टैंक से कुचल दिया गया। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा- “मासूमों के हाथ-पैर काट दिए गए। उनके गले काट दिए गए। महिलाओं के साथ उनके बच्चों के सामने दुष्कर्म हुआ। उनकी जीभ निकाल ली गईं, ताकि हमलावर उनकी चीखें न सुन पाएं। इसके बाद उन्हें जला दिया गया।” जेलेंस्की ने रूस की इस कथित बर्बरता को दूसरे विश्व युद्ध में हुए नरसंहारों से भी बदतर करार दिया। 

स्वतंत्र एजेंसियों का क्या कहना है?युद्ध की कवरेज करने वाले पत्रकारों और स्वतंत्र संस्थाओं का कहना है कि उन्होंने यूक्रेन में जो नजारा देखा, वो इस सदी के सबसे घातक दृश्यों में से एक रहा। कई लोगों को पास जाकर गोली मार दी गई। इसके अलावा कुछ लोगों को जलाकर दफन भी कर दिया गया। बूचा से कुछ सैटेलाइट फोटोज भी सामने आई हैं, जिनमें शहर की सड़कों को लाशों से पटा दिखाया गया है। 

क्या दोषी पाए जाने पर ओमुरबेकोव को हो सकती है सजा, रूस पर होगा कोई असर?अगर यह साबित होता है कि रूसी सेना ने बूचा में आम लोगों की हत्याएं कीं, तो अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर उस टुकड़ी के कमांडर यानी ओमुरबेकोव की ही होगी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) सिर्फ दो देशों या संस्थाओं के बीच के विवाद को सुलझा सकता है। आईसीजे के पास किसी व्यक्ति को सजा सुनाने का अधिकार नहीं है। यानी अगर बूचा नरसंहार मामले में आईसीजे रूस के खिलाफ आदेश देता है तो यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारी होगी कि वह आदेश लागू करवाए। लेकिन चूंकि यूएनएससी में रूस के पास वीटो है, इसलिए वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के किसी भी फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं है। ओमुरबेकोव पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) में केस जरूर चलाया जा सकता है। अगर जांचकर्ता इस रूसी जनरल के खिलाफ सबूत हासिल कर लेते हैं तो आईसीसी के जज ओमुरबेकोव के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी करेंगे। लेकिन चूंकि आईसीसी की अपनी कोई पुलिस या एजेंसी नहीं है तो उसे इन गिरफ्तारियों के लिए उस देश पर निर्भर रहना होता है, जहां अपराधी मौजूद हो। मौजूदा समय में रूस आईसीसी का हिस्सा नहीं है, ऐसे में पुतिन की ओर से अपने किसी जनरल का प्रत्यर्पण नामुमकिन है। 

Source : Amar Ujala

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