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दीया मिर्जा बोलीं- जब भी अपनी निजता साबित करती हूं, खुद को सशक्त पाती हूं

यूएन गुडविल एम्बेसडर दीया मिर्जा लंबे अरसे से पर्यावरण के हितों में काम करती आ रही हैं। हाल ही में इस सप्ताह होने वाली यूएनजीए (यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली) की बैठक में उन्हें यूएन गुडविल एम्बेसडर और यूएन सेक्रेटरी-जनरल की एडवोकेट के रूप में भाग लेने का मौका मिला है। इस बैठक में दीया की भागीदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यूएनजीए संयुक्त राष्ट्र संघ में वैश्विक मुद्दों पर पॉलिसी मेकिंग में अहम भूमिका निभाती है। पर्यावरण और फिल्मों के मुद्दे पर दीया से खास बातचीत।

इस सप्ताह होने वाली यूएनजीए (यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली) की बैठक में आप यूएन गुडविल एम्बेसेडर और यूएन सेक्रेटरी-जनरल की एडवोकेट के रूप में भाग लेने जा रही हैं, क्या सोच है आपकी?
-मैं खुश हूं कि कोविड के बाद मुझे इस बैठक में दोबारा जाने का मौका मिल रहा है। पिछले कुछ सालों में हम वहां जा नहीं पाए, इस बार आमने -सामने बातचीत और मुलाकात होगी। G20 समिट के बाद पर्यावरण को लेकर भारत और ग्लोबल साउथ के तमाम देशों की जो प्रतिबद्धता बनी है, वहां मुझे शामिल होने का मौका मिल रहा है, मगर साल भर में पर्यावरण के प्रति युवा पीढ़ी की जो सोच और काम है, मैं उन कहानियों को अपने साथ ले जा रही हूं। मैं अपने साथ उन लोगों के कारनामों को लेकर जा रही हूं, जिन्होंने समुद्र तटों के कचरे को साफ कर उनका सौंदर्यीकरण कर दिया है, ऐसे लोग जिन्होनें वाइल्डलाइफ के लिए सार्थक काम किया है। वहां मेरा फोकस सोल्यूशन पर होगा।

dia mirza interview

यूएनजीए की बैठक में भारत की भागीदारी को कैसे देखती हैं?
-जैसा कि आप जानते हैं कि यूएनजीए संयुक्त राष्ट्र संघ में वैश्विक मुद्दों पर पॉलिसी मेकिंग में अहम भूमिका निभाती है। भारत आज की तारीख में लार्जेस्ट यूथ पॉप्युलेशन वाला देश है। हम ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारी चॉइसेज, हमारा रहन-सहन, हम अपनी प्रकृति और पर्यावरण को कैसे ट्रीट करते हैं? हम कैसे एक सस्टेनेबल मॉडल बनाते हैं, जो हमारे लोगों को स्वस्थ रखता है, आर्थिक तौर पर सुरक्षित रखता है और जिन्हें हम सस्टेनेबल डेवलपमेंट कहते हैं, उनकी तरफ काम करता है। बहुत जरूरी है कि ये उजागर हो। हम आज बेहद महत्वपूर्ण देश हैं।

आप सालों से पर्यावरण के हितों के लिए काम कर रही हैं, आपको लगता है कोविड के बाद लोग एनवायरमेंट को लेकर ज्यादा जागरूक हुए हैं?
– बदलाव तो आया है। जो पढ़े-लिखे लोग हैं, वो समझने लगे हैं कि कुदरत कितनी अहम है और क्लाइमेट चेंज के क्या परिणाम हो सकते हैं। लोग बदल ही नहीं रहे बल्कि जलवायु जैसे मुद्दे पर काम भी करने लगे हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर आम आदमी से लेकर टॉप लेवल ताज को जुड़ना होगा। इकोनॉमिक ग्रोथ का जो ढांचा है, उसे बदलना होगा। हमने आजादी पाने के लिए आत्मनिर्भरता स्वायत्तता, वोकल फॉर लोकल की जो नीतियां अपनाई थीं, वह हमें पर्यावरण को बचाने के लिए लागू करनी होंगी। हमारे स्कूलों में एनवायर्नमेंटल स्टडी को कंपलसरी कर दिया जाए। हमें कचरे के प्रबंधन पर तुरत-फुरत काम पर लगना होगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के पचास दूषित शहरों में से 40 दूषित शहर भारत से हैं।

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