इस घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना सार्वजनिक सेवा में लगे अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने रत्नाकर साहू को कार्यालय से बाहर घसीटा और उन्हें लात-घूंसों से पीटा। यह हमला स्पष्ट रूप से किसी विवाद या असंतोष का परिणाम प्रतीत होता है। इस तरह की घटनाएँ लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारियों के कामकाज में बाधा डालती हैं और उन्हें भय के माहौल में काम करने पर मजबूर करती हैं। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि हमले के पीछे के असली मकसद और इसमें शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
इस घटना की कड़ी निंदा की जा रही है और प्रशासन ने ऐसी हरकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सार्वजनिक अधिकारियों पर हमले से न केवल कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, बल्कि यह सुशासन के प्रयासों को भी कमजोर करती है।



