नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में पाकिस्तान पर पांच बड़े फैसले लिए गए, जिनमें सिंधु जल समझौता को रोकने और अटारी बॉर्डर को बंद करने जैसे कदम शामिल हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं से आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, तब तक भारत किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेगा। सरकार के इस सख्त रुख को देशभर में समर्थन मिल रहा है।
ये हैं सरकार के पांच बड़े कदम:
1. सिंधु जल समझौता रोका गया: भारत ने 1960 में किए गए सिंधु जल समझौते को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। अब पाकिस्तान को जाने वाली सिंधु और उसकी सहायक नदियों का पानी रोका जाएगा और इसे देश के भीतर मोड़ा जाएगा।
2. अटारी बॉर्डर बंद: भारत-पाकिस्तान के बीच पंजाब स्थित अटारी बॉर्डर को अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जा रहा है। यह सीमा व्यापार और आवाजाही का प्रमुख मार्ग है।
3. एमएफएन (मोस्ट फेवर्ड नेशन) दर्जा रद्द: पाकिस्तान को दिया गया एमएफएन का दर्जा पूरी तरह से खत्म किया गया है, जिससे वहां से आयात पर कड़े प्रतिबंध लगेंगे।
4. सांस्कृतिक और खेल संबंधों पर रोक: भारत ने पाकिस्तान के साथ सभी प्रकार के सांस्कृतिक, खेल और शैक्षणिक आदान-प्रदान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
5. राजनयिक स्तर पर विरोध: भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की रणनीति तेज कर दी है।
केंद्र सरकार के इन कदमों को लेकर देश में जनता और विपक्ष दोनों तरफ से सराहना हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव में लाने का मजबूत संकेत है।



