सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल: उत्तर बंगाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने क्षेत्र के चाय बागानों में भारी तबाही मचाई है। चाय उद्योग को ₹100 करोड़ से अधिक के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान है, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गहरा आघात लगा है। यह आपदा न केवल उद्योग, बल्कि हजारों श्रमिकों की आजीविका के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
चाय बागान मालिकों का अनुमान है कि क्षतिग्रस्त बागानों में नए चाय के पौधे लगाने और उन्हें उत्पादन के लिए तैयार करने में कम से कम 3 से 4 साल का समय लग सकता है। बाढ़ के पानी और मिट्टी के कटाव (Soil Erosion) के कारण हजारों एकड़ में फैले चाय के पौधे जड़ से उखड़ गए हैं या कीचड़ में दब गए हैं। इस दीर्घकालिक नुकसान का सीधा असर उत्पादन, निर्यात और रोजगार पर पड़ेगा। बागान मालिकों ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल वित्तीय सहायता और पुनर्वास पैकेज की मांग की है।
राज्य सरकार ने क्षति का विस्तृत आकलन करने के लिए विशेष टीम गठित की है।


