महिमा मेहरा ने हिमालयन गांवों को स्वयंसेवा और शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाया है।
लद्दाख में एक संयोगवश स्वयंसेवा कार्यकाल ने महिमा मेहरा का जीवन बदल दिया।












अब, वह हिमालयन वॉलंटियर टूरिज्म और शिक्षा एनजीओ स्रोट का नेतृत्व करती हैं, जिसके माध्यम से उन्होंने ग्रामीण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और वैकल्पिक पर्यटन में अपनी पहल के साथ हजारों लोगों को प्रभावित किया है।
महिमा मेहरा ने अपने कॉलेज के दिनों में लद्दाख में एक स्वयंसेवा कार्यक्रम में भाग लिया था। इस अनुभव ने उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता को समझने में मदद की। उन्होंने लद्दाख में एक स्कूल में पढ़ाने शुरू किया और जल्द ही उन्हें स्थानीय समुदाय के लोगों की जरूरतों का पता चल गया।
महिमा मेहरा ने हिमालयन वॉलंटियर टूरिज्म और शिक्षा एनजीओ स्रोट की स्थापना की। इस एनजीओ का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन को बढ़ावा देना है। एनजीओ ने ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए हैं। एनजीओ ने स्थानीय समुदायों के लोगों को भी पर्यटन उद्योग में शामिल होने के लिए प्रशिक्षित किया है।
महिमा मेहरा का मानना है कि शिक्षा ही ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की कुंजी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपने जीवन में सुधार लाने का अवसर मिलता है।
महिमा मेहरा का काम हिमालयन गांवों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। उनके प्रयासों से हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।



