स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से चरमराई अस्पताल की व्यवस्था बगैर इलाज लौट रहे मरीज

रांची में राजभवन के समक्ष मंगलवार से हड़ताल करने वाले कर्मियों ने एक समूह ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है सरकार से इस मामले में बात करने पर भी कोई हल नहीं निकला
झारखंड में कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत पारा मेडिकल कर्मियों और नर्सों की 8 दिनों से जारी हड़ताल के चलते राज्य भर के अस्पतालों में बड़ी तादाद हर रोज मरीज बगैर इलाज के लौट रहे हैं. सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था ज्यादातर बेपटरी हो गई है. टीकाकरण सभी जिलों में बुरी तरह प्रभावित हुआ है. एक्स-रे और पैथोलॉजीकल जांच भी नहीं हो पा रही है. डिस्ट्रिक्ट सदर अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी में वैक्सीनेशन के लिए बच्चों और डिलीवरी के लिए महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. रांची में राजभवन के समक्ष मंगलवार से हड़ताल कर्मियों के एक जत्थे ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है.
कोई हल नहीं निकला अब तक
आंदोलित कर्मियों की मांग है कि सरकार उनकी सेवा स्थायी करे. उनका कहना है कि बार-बार के आश्वासन के बाद भी सरकार के ढुलमुल रवैए के कारण उनका भविष्य अधर में लटका है. रांची, जमशेदपुर, चाईबासा, जामताड़ा, हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, गुमला, सिमडेगा, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज सहित प्राय: सभी जिलों में स्वास्थ्यकर्मी हॉस्पिटल्स के सामने लगातार धरना दे रहे हैं. झारखंड अनुबंधित पारा चिकित्सा कर्मी संघ, झारखंड अनुबंधित एएनएम, जीएनएम संघ के प्रवक्ता ने कहा कि अनुबंध कर्मी पिछले 16 से 17 वर्षों से सेवा दे रहे हैं. कई बार राज्य सरकार से नियमितीकरण को लेकर इनकी वार्ता हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला.



