JharkhandStates

नौ साल पुराने हत्या मामले में लालू राम बरी.

हाईकोर्ट ने निचली अदालत का उम्रकैद फैसला किया रद्द.

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला के करीब नौ साल पुराने हत्या मामले में लालू राम को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उम्रकैद की सजा काट रहे लालू राम को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने गुमला की निचली अदालत के अप्रैल 2017 के सजा के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या का आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। यह फैसला लालू राम की ओर से दाखिल क्रिमिनल अपील पर सुनाया गया। मामले में लालू राम को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा दी गई थी। सजा के बाद से वह जेल में बंद था। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों पर विचार किया। अदालत ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके बाद कोर्ट ने उसे संदेह का लाभ देने का फैसला किया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि लालू राम किसी अन्य आपराधिक मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।

मामला वर्ष 2014 का है और गुमला के पालकोट थाना क्षेत्र से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 23 अगस्त 2014 को पीरहा चट्टान गांव में रामप्रीत राम की हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि रामप्रीत राम की गर्दन पर कुल्हाड़ी से वार किया गया था। बताया गया कि घटना के समय रामप्रीत राम अपने घर में सो रहा था। अभियोजन ने हत्या के पीछे जमीन विवाद को वजह बताया था। आरोप था कि जमीन विवाद को लेकर उसके चचेरे भाई लालू राम ने उस पर हमला किया। घटना के बाद इलाके में मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। इसके बाद 24 अगस्त 2014 को पालकोट थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने इस मामले में कांड संख्या 52/2014 दर्ज किया था। जांच के बाद पुलिस ने लालू राम के खिलाफ हत्या की धारा 302 IPC के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद मामला निचली अदालत में चला और सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्य पेश किए।

निचली अदालत ने अप्रैल 2017 में लालू राम को हत्या का दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद लालू राम ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल की। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने अभियोजन के साक्ष्यों की पर्याप्तता पर सवाल उठाते हुए दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित होना जरूरी है। इस मामले में अभियोजन पक्ष उस स्तर का प्रमाण प्रस्तुत करने में सफल नहीं रहा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया। लालू राम को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया। जेल प्रशासन को भी अदालत के निर्देश के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। हालांकि, उसकी रिहाई इस शर्त पर होगी कि वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो। हाईकोर्ट के इस फैसले से करीब नौ साल पुराने मामले का एक महत्वपूर्ण न्यायिक अध्याय समाप्त हो गया।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button