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हूल दिवस पर मुख्यमंत्री ने सिदो-कान्हू को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

शोषण के विरुद्ध हूल क्रांति के अमर वीरों का योगदान किया याद.

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन और विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने हूल दिवस के अवसर पर रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर अमर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। दोनों नेताओं ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हूल दिवस झारखंड के गौरवशाली इतिहास का महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि यह दिन शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि उस समय समाज के सामने कठिन परिस्थितियां थीं। इसके बावजूद आदिवासी वीरों ने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो ने साहस और बलिदान की मिसाल पेश की। उन्होंने कहा कि इन वीरों का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने सभी लोगों से उनके आदर्शों को अपनाने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी समाज में कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी है। उन्होंने कहा कि हर परिवर्तन की शुरुआत अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से होती है। उन्होंने कहा कि हूल क्रांति का संदेश आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि झारखंड वीरों और बलिदानियों की धरती है। यहां के महापुरुषों का इतिहास पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोग समय-समय पर अपने महान नेताओं को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके बताए रास्ते पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि समाज में न्याय और समानता स्थापित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर बेहतर समाज बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वीरों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रांति की भावना कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने कहा कि इसे कोई शक्ति दबा नहीं सकती। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि संघर्ष की चिंगारी हमेशा जीवित रहती है। उन्होंने दिल्ली के राजघाट और इंडिया गेट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आज भी अमर जवानों की स्मृति में दीप जलता रहता है। उन्होंने कहा कि वीरों के सम्मान की परंपरा हमेशा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हूल विद्रोह भारतीय इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। उन्होंने कहा कि झारखंड की यह पावन धरती हमेशा अपने वीर सपूतों के लिए जानी जाएगी। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। कार्यक्रम का समापन अमर शहीदों के प्रति सामूहिक श्रद्धांजलि के साथ हुआ।

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