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सभी कोविड वैक्सीन का रिव्यू कीजिए… कोविशील्ड से खतरे के बीच डॉक्टरों की सरकार से अपील

दवा कंपनी एस्ट्राजेनिका के कोविशील्ड को लेकर किए गए कबूलनामे के बाद से देश ही नहीं दुनिया में भी टेंशन है। कंपनी ने ब्रिटेन की अदालत में यह माना था कि कोराना के लिए उसकी वैक्सीन से खून के थक्के जमने और हार्ट अटैक का खतरा है। इसके बाद भारत में कोविशील्ड लगवा चुके लोग संशय और डर में जी रहे हैं। कोविशील्ड के साइड इफेक्ट सामने आने के बाद देश के डॉक्टरों के एक समूह ने केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। अवेकन इंडिया मूवमेंट (AIM) के नाम से पहचाने जाने वाले डॉक्टरों के समूह ने सरकार से आग्रह किया कि वे सभी कोविड वैक्सीन के पीछे के विज्ञान की समीक्षा करें। यह भी सुनिश्चित करें कि टीका लगने के बाद किसी भी तरह की परेशानी का जल्द पता लगाया जा सके।

डॉक्टरों ने केंद्र सरकार पर ही उठा दिए सवाल
डॉक्टर तरुण कोठारी रेडियोलॉजिस्ट और कार्यकर्ता हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार ने अब तक कोविड वैक्सीन लगने के बाद हुईं दुखद मौतों के बढ़ते मामलों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है और वैज्ञानिक जांच के बिना और महामारी विज्ञान का हवाला दिए बिना कोविड वैक्सीन को ‘सुरक्षित और प्रभावी’ बताने का प्रचार करती रही है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में कोविड वैक्सीन के एक साइड इफेक्ट के बारे में पता चल रहा है जिसे थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (TTS) कहा जाता है।

डॉ सुजाता मित्तल एक स्त्री रोग विशेषज्ञ और ऑन्कोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने कहा कि जब कोविड-19 वैक्सीन लगाई जा रही थी, तब बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह फेज-3 ट्रायल पूरे हुए बिना किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के पास संभावित अल्पकालिक या दीर्घकालिक दुष्प्रभावों या मृत्यु के बारे में पूरी जानकारी और डेटा न होने के बावजूद COVID-19 वैक्सीन देना शुरू कर दिया गया था।

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