दरअसल, यूरोपीय संघ द्वारा तैयार किए गए एक दस्तावेज में इस अंतरराष्ट्रीय करार को अंतिम रूप देने को “सर्वोच्च प्राथमिकता” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.
बता दें कि अमेरिका डिजिटल करार को लेकर असहमत है और उसने इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों को चेतावनी भी दी है. अमेरिका का कहना है कि अगर यूरोपीय देश आगे बढ़कर यूरोपीय कंपनियों को छूट देते हुए अमेरिकी कंपनियों पर कर लगाते हैं, तो वो जवाबी कार्रवाई करेगा. जवाबी कार्रवाई के तहत अमेरिका यूरोपीय सामानों पर भारी शुल्क लगा सकता है, जिसे टैरिफ युद्ध की शुरुआत माना जा सकता है.
हालांकि, यूरोपीय संघ इस करार को अंतिम रूप देने के लिए مصمم (musaddam – दृढ़) दिखाई दे रहा है. उनका कहना है कि यह करार बहुराष्ट्रीय कंपनियों, खासकर बड़ी टेक कंपनियों को उन देशों में उचित कर चुकाने की बाध्यता लगाएगा, जहां वो अपना व्यापार करते हैं. गौरतलब है कि कई टेक कंपनियां कम कर वाले देशों में अपने मुख्यालय स्थापित कर देती हैं, जिससे उन्हें उन देशों में कम कर देना होता है जहां वो असल में अपना व्यापार करती हैं.
अगर यह करार अंतिम रूप ले लेता है, तो इससे वैश्विक स्तर पर कर व्यवस्था में काफी बदलाव आ सकते हैं. आने वाले समय में जी20 देशों की बैठक में इस पर होने वाली चर्चा पर सभी की निगाहें रहेंगी.



