मुंबई, महाराष्ट्र: अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए नए टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर समग्र प्रभाव सीमित रहेगा, लेकिन भारतीय रुपया दबाव में रहेगा। यह कहना है केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा का। उन्होंने यह विश्लेषण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत के आयात शुल्क के संदर्भ में किया है।
सिन्हा का मानना है कि भारत की मजबूत घरेलू मांग और निर्यात पर कम निर्भरता के कारण अर्थव्यवस्था पर कुल मिलाकर असर हल्का होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए ये टैरिफ लगाए हैं, और भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (trade surplus) लगभग 41 बिलियन डॉलर का था। हालांकि, भारत अभी भी संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की रक्षा के लिए अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है।
सिन्हा ने यह भी कहा कि नए टैरिफ के कारण रुपये पर दबाव बढ़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) के लगातार बहिर्वाह (outflows) और डॉलर की मजबूती से भी रुपये पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में रुपया दबाव में रहेगा, हालांकि दीर्घकालिक पूर्वानुमान में सुधार की संभावना है।



