Uncategorized

बिहार में जून-जुलाई में ही क्यों लड़ते हैं मंत्री और अधिकारी? अंदर की बात जान हिल जाएंगे

बिहार का राजनीतिक प्लेटफॉर्म बड़ा विचित्र है। अक्सर जून-जुलाई में मंत्री और अधिकारी आपस में लड़ने लगते हैं। अब सवाल उठता है कि जून-जुलाई में ही घमासान क्यों होता है? यह किसी एक मंत्री और किसी एक अधिकारी के झगड़े की कहानी नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार का राजनीतिक जगत ऐसे ही कुछ झगड़ों के कारण चर्चित रहा है। फिलहाल बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंत्री ने अपर मुख्य सचिव को पीत पत्र क्या लिखा, यह झगड़ा सार्वजनिक हो गया। जवाब में आईएएस अधिकारी केके पाठक ने मंत्री के पीएस को दफ्तर में घुसने पर पाबंदी लगाकर अपर मुख्य सचिव ने शिक्षा मंत्री को खुली चुनौती दे दी।

लेकिन सच यही है क्या?

राजनीतिक गलियारों में इस झगड़े को लेकर यह कहा जा रहा है कि इस लड़ाई के पीछे का हिडेन एजेंडा जून महीने में मंत्री स्तर से अफसरों का होने वाला स्थानांतरण-पदस्थापन है। इस बार भी अधिकांश विभाग में अफसरों के तबादले हुई, पर शिक्षा विभाग इससे वंचित रहा, जबकि यह माह DEO और BEO के स्थानांतरण का होता है। कहा जा रहा है कि इस खीज में मंत्री ने पीत पत्र लिखकर कई आरोप लगाए, मगर इस पत्र में तबादला का कोई जिक्र नहीं किया।

समाज कल्याण मंत्री और अधिकारी केके पाठक

यह किस्सा वर्ष 2021 का है, जब जेडीयू कोटे से समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने सीएम नीतीश और उनके अफसरों पर आरोप लगाकर इस्तीफा तक देने की बात कह डाली। तब मंत्री मदन सहनी ने कहा था कि अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। मेरे महकमे में अधिकारी तो छोड़ दीजिए, चपरासी तक मेरी बात नहीं मानते। अफसरों की तानाशाही वर्षों से झेल रहा हूं। इसलिए अब मंत्री पद छोड़ना ही एक मात्र चारा है। मंत्री साहनी के इस गुस्से की वजह भी तब भी राजनीतिक गलियारों में तबादले से जुड़ी एक फाइल के बारे में चर्चा थी। तब चर्चा 134 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) के तबादले से जुड़ी थी। कहा जाता है उस सूची में मात्रा 18 का तबादला हुआ, शेष तबादलों की फाइल विभाग के अपर मुख्य सचिव के पास गई, लेकिन लौटी नहीं। मंत्री मदन सहनी ने कई दिनों तक हाई वोल्टेज ड्रामा किया। इसके बाद सीएम नीतीश हरकत में आए और मंत्री और अफसर को बुलाया। और वही हुआ जो शिक्षा मंत्री के साथ हुआ।

ऐसा ही रगड़ा मंगल पांडे और संजय कुमार के साथ हुआ

वर्ष 2017 में जब मंगल पांडे स्वस्थ मंत्री थे तो उन्हें भी प्रधान सचिव संजय कुमार से रगड़ा हुआ था। तब भी वजह थी तबादला! तत्कालीन स्वास्थ मंत्री मंगल पांडे के द्वारा चिकित्सकों के तबादले की फाइल पर प्रधान सचिव संजय कुमार ने फाइल वापस नहीं किया। तकरार बढ़ा और बाद में यह फाइल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भेज दी। वर्ष 2017 में ही जब विजय सिन्हा श्रम मंत्री थे, तब तबादले को लेकर भी तत्कालीन प्रधान सचिव से ठन गई। पर भाजपाई मंत्री विवाद को ज्यादा तुल नहीं दिया और बाद में मामला किसी तरह से निपटाया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button