Uncategorized

एक ज्योति मौर्य हैं, दूसरी पेशाब कांड के पीड़ित दशमत की पत्नी, सही-गलत नहीं, सवाल नजरिये का है

उत्तर प्रदेश के बरेली में पदस्थ पीसीएस अधिकारी ज्योति मौर्य इन दिनों चर्चा में हैं। ज्योति मौर्य ने अपने पति को तलाक का नोटिस भेजा है। इसको लेकर वे सोशल मीडिया में छाई हुई हैं। इधर, मध्य प्रदेश के सीधी में हुआ पेशाब कांड भी सुर्खियों में है। गुरुवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इस कांड के पीड़ित आदिवासी युवक दशमत से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने दशमत की पत्नी से भी फोन पर बात की। दोनों की बातचीत का वीडियो वायरल हो रहा है।

ज्योति मौर्य और दशमत की पत्नी में कई समानताएं हैं। दोनों समाज के कमजोर वर्ग से ताल्लुक रखती हैं। दशमत की पत्नी की तरह ज्योति का बचपन भी गरीबी में बीता। शादी के बाद सफाईकर्मी पति ने उनकी पढ़ाई में मदद की और वे एसडीएम बन गईं। आरोप है कि पद और ओहदा मिलने के बाद उनका नजरिया बदल गया। ज्योति के पति का आरोप है कि उनका एक दूसरे शख्स के साथ अफेयर शुरू हो गया। पति ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ा तो ज्योति ने पति को ही छोड़ने का फैसला कर लिया। उन्होंने तलाक की अर्जी लगा दी।

दूसरी ओर दशमत की पत्नी हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनसे फोन पर बात की। शिवराज ने उनसे कहा कि तुम मेरी बहन हो। तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होने दूंगा। तुम्हारा घर बनवा दूंगा और बाकी जरूरतें पूरी करने के लिए पैसे भी भिजवा दूंगा। गरीब महिला ने जो जवाब दिया, वह सुनकर मुख्यमंत्री भी हड़बड़ा गए। दशमत की पत्नी ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए, बस उनके पति को भेज दें।

ज्योति मौर्य के खिलाफ अभी कोई भी आरोप साबित नहीं हुए। इसलिए उनको दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह भी इतना ही सत्य है कि पति के साथ रहना या नहीं रहना, यह पत्नी का व्यक्तिगत फैसला है। पति-पत्नी के संबंधों के बीच में किसी तीसरे को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। लेकिन यह मामला नजरिये का है। एक तरफ ज्योति मौर्य हैं जो एसडीएम बनने के बाद अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती। दूसरी तरफ दशमत की पत्नी हैं जिन्हें खुद मुख्यमंत्री हर सुख सुविधा देने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन उन्हें कुछ नहीं चाहिए। उन्हें केवल अपना पति घर पर चाहिए। अब इनमें सही कौन है और कौन गलत, ये फैसला आपका है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button