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गर्भवती पत्नी अपनी महिला साथी के साथ रहने के लिए घर से गई, गुजरात हाई कोर्ट ने पति की कस्टडी याचिका खारिज की.

पति ने अदालत में याचिका दायर कर अपनी पत्नी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की कस्टडी मांगी थी।

 उसने दावा किया था कि उसकी पत्नी का यह फैसला गलत है और वह बच्चे का पालन-पोषण नहीं कर पाएगी।

लेकिन, अदालत ने पति की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पत्नी को अपनी पसंद का जीवन जीने का अधिकार है। अदालत ने यह भी कहा कि पत्नी गर्भवती है और उसे सुरक्षित वातावरण में रहने की जरूरत है। अदालत ने यह मानते हुए कि पत्नी और उसकी महिला साथी बच्चे का अच्छी तरह से पालन-पोषण कर पाएंगी, पति की याचिका खारिज कर दी।

यह फैसला समलैंगिक अधिकारों और महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

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