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अमित शाह-वसुंधरा की जुगलबंदी के पीछे क्या है राज ? राजे की तारीफ कहीं डैमेज कंट्रोल तो नहीं, समझिए मायने

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के कारण बीजेपी के नेताओं के नए-नए दांवपेच देखने को मिल रहे हैं। परिवर्तन यात्रा में कमान नहीं सौंपने के कारण सियासी गलियारों में वसुंधरा राजे की नाराजगी को लेकर चर्चे हो रहे हैं। वहीं इस बीच बीजेपी की दो परिवर्तन यात्राओं से राजनीतिक पारा चढ़ गया है। बेणेश्वर धाम में दूसरी परिवर्तन यात्रा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और वसुंधरा राजे के बीच केमिस्ट्री काफी चर्चा का विषय बनी। वहीं सवाई माधोपुर की परिवर्तन यात्रा में भी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने वसुंधरा राजे की जमकर तारीफ की। इन दोनों घटनाओं लेकर राजस्थान की सियासत में कई मायने निकाले जा रहे हैं।

अमित शाह और वसुंधरा ने एक-दूसरे की जमकर तारीफ की

डूंगरपुर में बेणेश्वर धाम की दूसरी परिवर्तन यात्रा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और वसुंधरा राजे के बीच जमकर कैमिस्ट्री देखने को मिली। जहां एक और परिवर्तन यात्रा में कमान नहीं सौपने के कारण वसुंधरा राजे को नाराज माना जा रहा है। वहीं इसी बीच वसुंधरा ने एक दिन पहले देव दर्शन यात्रा निकालकर बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की। इस दौरान बेणेश्वर धाम में अमित शाह ने वसुंधरा राजे की ओर से राजस्थान में करवाए गए विकास कार्यों को लेकर जमकर तारीफ की। दूसरी ओर वसुंधरा राजे ने भी अमित शाह की तारीफ में जमकर कसीदे पढ़े। इस दौरान दोनों नेताओं की एक दूसरे की तारीफ को लेकर सियासत में कई नजरिए देखे जा रहे हैं।

वसुंधरा की तारीफ़ के पीछे क्या हो सकते हैं मायने?

बेणेश्वर धाम में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह की ओर से वसुंधरा राजे की तारीफ को लेकर सियासत में हलचल मची हुई है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी उदयपुर में अमित शाह ने अपने संबोधन से पहले वसुंधरा राजे का संबोधन करवाया। जो राजनीति में काफी सुर्खियों में रहा। सवाई माधोपुर में भी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी वसुंधरा राजे की तारीफ की। इसके पीछे राजनीतिक जानकारों का मानना है कि परिवर्तन यात्रा के दौरान उन्हें जो कमान नहीं सौंप गई। वसुंधरा राजे में इसकी नाराजगी है। इसी के चलते बेणेश्वर धाम में अमित शाह की ओर से की गई प्रशंसा को वसुंधरा की नाराजगी को दूर करने से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या वसुंधरा को दिल्ली ले जाने के लिए कोशिश तो जारी नहीं?

पिछले कुछ दिनों से जो घटनाक्रम देखे गए हैं। उसके बाद वसुंधरा राजे और बीजेपी के बीच दूरी का अहसास हुआ है। उधर, भाजपा ने गत दिनों वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर उन्हें दिल्ली बुलाने के संकेत दिए। लेकिन वसुंधरा राजे दिल्ली नहीं जाना चाहती। बताया जा रहा है कि इसका उन्होंने दिल्ली जाकर संदेश भी दिया। इसको लेकर भी बीजेपी और वसुंधरा के बीच दूरियां दिखाई दी। राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में बीजेपी भी वसुंधरा को नाराज कर कोई खतरा माल नहीं लेना चाहती है। ऐसे में सवाई माधोपुर और बेणेश्वर धाम की सभा में जेपी नड्डा और अमित शाह ने वसुंधरा राजे की तारीफ कर उन्हें साधने का प्रयास किया है।

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