JharkhandStates

टेरर फंडिंग मामले में सुभान मियां को जमानत.

झारखंड हाईकोर्ट ने साढ़े छह साल से अधिक जेल में रहने पर दी राहत.

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने टंडवा कोल परियोजना से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में दोषी सुभान मियां को जमानत दे दी है। यह मामला चतरा जिले के मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाओं से जुड़ा है। सुभान मियां इस मामले में सजा काट रहे थे। उन्होंने हाईकोर्ट में अंतरिम आवेदन दाखिल कर जमानत की मांग की थी। आवेदन में उन्होंने जेल में साढ़े छह साल से अधिक समय बिताने का हवाला दिया था। अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए राहत प्रदान की। यह फैसला हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने सुनाया। सुनवाई के दौरान सुभान मियां की ओर से जमानत का आग्रह किया गया। एनआईए की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा। अदालत ने मामले में सुनवाई के बाद सुभान मियां को जमानत दे दी। इससे पहले इसी मामले में सात अन्य सजायाफ्ताओं को भी हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। इस मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने 12 दोषियों को सजा सुनाई थी। दोषियों को आठ से दस साल तक की कैद दी गई थी। अदालत ने दोषियों पर 40 हजार से 90 हजार रुपये तक जुर्माना भी लगाया था। सुभान मियां की जमानत याचिका पर फैसला इसी मामले की सुनवाई के दौरान आया है।

टंडवा थाना में दर्ज मामले को एनआईए ने 13 फरवरी 2018 को अपने हाथ में लिया था। यह केस कांड संख्या 2/2016 के तहत दर्ज किया गया था। मामले की जांच के बाद एनआईए ने 16 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में मुकदमा चला। जांच में एनआईए ने कोयला परियोजनाओं से जुड़े टेरर फंडिंग नेटवर्क का पता लगाया था। एजेंसी के अनुसार, सीसीएल, पुलिस, उग्रवादी संगठन और शांति समिति के बीच समन्वय से फंडिंग की जा रही थी। जांच में तृतीय प्रस्तुति समिति यानी टीपीसी को आर्थिक सहायता देने की बात सामने आई थी। एनआईए ने पाया कि मगध और आम्रपाली परियोजनाओं में कोयला ढुलाई के ठेके ऊंची दरों पर लिए गए थे। एजेंसी के मुताबिक, इसका उद्देश्य टीपीसी को लेवी देना था। मामले में दोषियों को विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने सुभान मियां को अंतरिम जमानत प्रदान की है। इस फैसले से मामले में सजा काट रहे एक अन्य दोषी को राहत मिली है। हालांकि, जमानत मिलने का अर्थ दोषसिद्धि समाप्त होना नहीं है। मामले की कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित तरीके से जारी रहेगी।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button