रांची: सहायक आचार्य शिक्षक नियुक्ति में दो साल बीएड करने वाले अभ्यर्थियों को कंसीडर करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जेएसएससी ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने की। खंडपीठ ने जेएसएससी की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने सरकार और जेएसएससी को 70 पद रिक्त रखने का निर्देश दिया। इन पदों पर फिलहाल नियुक्ति नहीं करने को कहा गया है। कोर्ट ने मामले में दायर अवमानना याचिका की सुनवाई पर भी रोक लगा दी। यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी। इस आदेश से सहायक आचार्य नियुक्ति में दो वर्षीय बीएड अभ्यर्थियों का मामला फिलहाल लंबित हो गया है।
दरअसल, विप्लव दत्त के मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश दिया था। एकल पीठ ने दो साल बीएड करने वाले प्रार्थियों को सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में कंसीडर करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने उनके परिणाम जारी करने का भी आदेश दिया था। इन अभ्यर्थियों ने कक्षा छह से आठ तक गणित, विज्ञान और अन्य विषयों के लिए आवेदन किया था। अभ्यर्थियों का कहना था कि 29 जनवरी 2024 के संशोधन में दो साल बीएड को मान्य किया गया था। इसी आधार पर उन्होंने खुद को नियुक्ति परीक्षा के लिए योग्य बताया था। उन्होंने परीक्षा में शामिल करने और परिणाम जारी करने की मांग की थी। एकल पीठ के आदेश के बाद जेएसएससी ने इसे खंडपीठ में चुनौती दी। अब खंडपीठ इस अपील पर आगे सुनवाई करेगी।
जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने खंडपीठ के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने परिमल कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा के लिए सहायक आचार्य नियुक्ति नियमावली 2022 लागू रहेगी। उनके अनुसार 29 जनवरी 2024 की संशोधित नियमावली इस नियुक्ति प्रक्रिया पर लागू नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दो साल बीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश नहीं दिया था। जेएसएससी के अनुसार 2022 की नियमावली के तहत जारी विज्ञापन में एक वर्षीय बीएड को न्यूनतम योग्यता माना गया था। यह नियुक्ति वर्ष 2023 के विज्ञापन के आधार पर की जा रही है। इसी वजह से आयोग ने दो वर्षीय बीएड अभ्यर्थियों की पात्रता पर आपत्ति जताई है। अब इस मामले में हाईकोर्ट के अगले आदेश का इंतजार है।



