सोमवार देर शाम मुख्यमंत्री सचिवालय में एन. बीरेन सिंह की अध्यक्षता में एक आपातकालीन बैठक हुई।
यह बैठक तब हुई जब नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) ने राज्य सरकार से समर्थन वापस ले लिया। बैठक में कूकी उग्रवादियों के खिलाफ सात दिनों के भीतर बड़े पैमाने पर अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। साथ ही, केंद्र सरकार से AFSPA के छह पुलिस थानों में लागू आदेश पर पुनर्विचार की मांग करने का भी फैसला किया गया।
बैठक में जिरीबाम में छह महिलाओं और बच्चों की हत्या, ज़ैरवान गांव में एक हमार महिला की हत्या, और बिष्णुपुर जिले में एक मैतेई महिला किसान की हत्या की जांच NIA को सौंपने की सिफारिश की गई। कूकी उग्रवादियों को “अवैध संगठन” घोषित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
विधायकों ने कहा कि यदि इन प्रस्तावों को समय सीमा में लागू नहीं किया गया, तो वे जनता से परामर्श कर अगला कदम उठाएंगे। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से शांति बहाल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की अपील की।
बैठक में विधायकों और मंत्रियों के घरों पर हमलों की निंदा की गई और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई। इस बैठक में 27 विधायक और मंत्री उपस्थित थे, जबकि सात सदस्य स्वास्थ्य कारणों से और 11 अन्य बिना किसी कारण के अनुपस्थित रहे।
बैठक राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को देखते हुए बुलाई गई थी। राज्य सरकार ने इम्फाल सहित सात जिलों में इंटरनेट सेवाओं को 20 नवंबर तक के लिए निलंबित कर दिया है।
इम्फाल में हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहे। कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रेशन (COCOMI) ने सरकारी कार्यालयों को बंद करवा दिया। मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी मुख्यमंत्री और राज्यपाल के पुतले जलाकर जल्द समाधान की मांग की।
जिरीबाम में रविवार रात CRPF ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए फायरिंग की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और एक अन्य घायल हो गया।


